विधान परिषद चुनाव के परिणमड्ड
गाजियाबाद (युग करवट)। हर चुनाव में कांगे्रस को हार मिल रही है। बंगाल का चुनाव हो, बिहार को चुनाव हो या किसी और राज्य का चुनाव हो कांगे्रस अपनी मजबूती का अहसास नहीं करा पा रही है। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त कि खिलाफ सडक़ों पर आंदोलन कर रहे हैं। राहुल गांधी एवं अन्य विपक्षी दलों की ये मांग रही है कि ईवीएम के जरिए चुनाव नहीं कराये जाएं और बेलेट पेपर से चुनाव हो। विपक्ष का आरोप है कि ईवीएम के जरिए भाजपा लगातार अपनी सरकार बना रही है क्योंकि ईवीएम में कुछ गड़बड़ी है।
बेलेट पेपर से चुनाव होंगे तो भाजपा नहीं जीत पायेगी। विधान परिषद चुनाव देश के कई राज्यों में हुए और ये चुनाव बेलेट पेपर के जरिए हुए है। उत्तर प्रदेश में कांगे्रस ने अपना कोई भी उम्मीदवार नहीं उतारा था और केवल समाजवादी पार्टी एवं भाजपा ने ही अपने उम्मीदवार उतारे थे। बसपा भी विधान परिषद चुनाव से अलग रही। अन्य राज्यों में कांग्रेस ने जरूर अपने उम्मीदवार उतारे थे। केरल में बेलेट से चुनाव हुए लेकिन यहां एनडीए ने बाजी मारी और इंडिया गठबंधन यानि कांगे्रस कोई खास असर नहीं दिखा पायी। केरल जैसे राज्य में कांगे्रस का पिछडऩा अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है। इन चुनाव परिणाम से ये बात भी सामने आती है कि विपक्ष जो बार-बार बेलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करता है इस मांग में भी कोई दम नहीं है क्योंकि बेलेट पेपर से हुए चुनाव के बाद भी इंडिया गठबंधन खासकर कांगे्रेस अपना कोई जलवा नहीं दिखा पायी। वैसे भी ये देखा गया है कि जब भी कोई बड़ा आंदोलन या कोई चुनाव होता है तो कांगे्रस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी घूमने निकल जाते हैं। विधान परिषद के चुनाव और वो भी बेलेट पेपर से होना, शिक्षित लोगों द्वारा वोट करना और उसमें भी कांगे्रस कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ रही है तो ये कांगे्रस के लिए आत्म मंथन का विषय है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने अपने अकेले दम पर चुनाव लडक़र अपनी मजबूत पकड़ का अहसा जरूर कराया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने अच्छे वोट लिये जिसकी उम्मीद भी नहीं थी। इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार दिनेश गोयल 13 हजार वोटों के आसपास चुनाव जीते और दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव में कहीं दिखाई भी नहीं दिये और इसके बाद भी इतना वोट आना एक मजबूती का अहसास कराता है। जबकि दिनेश गोयल एवं श्रीचंद शर्मा के लिए पूरी भाजपा हाईकमान जहां लगी थी वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं गाजियाबाद आये थे और कई सौ बसों में भरकर शिक्षकों को सुंदरदीप कॉलेज में आयोजित मुख्यमंत्री के संवाद कार्यक्रम में ले जाया गया था।
उसके बाद भी सपा के उम्मीदवार को 13 हजार से हराना इस बात का संकेत है कि ना प्रचार ना प्रसार उसके बाद भी एक बड़े वर्ग ने सपा के उम्मीदवार को भी अच्छे वोट दिये। बहरहाल, बेलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करने कांगे्रस की स्थिति ऐसी होगी ये शायद किसी ने सोचा नहीं होगा। इसलिए अब यूपी में सपा की शर्तों पर ही गठबंधन होगा इसकी चर्चाएं और बढ़ गई है और कांगे्रस को सपा की शर्तों पर ही गठबंधन करना पड़ेगा।