दो दिवसीय भाजपा की कार्यसमिति की बैठक
गाजियाबाद (युग करवट)। लखनऊ में दो दिवसीय कार्य समिति को लेकर भाजपा के कई नेताओं के घर में राड़ हो गई। दरअसल, कल करवाचौथ था और सभी को आज सुबह आठ बजे लखनऊ बुलाया गया। भाजपा के कई नेताओं ने बताया कि सुबह आठ बजे बैठक में शामिल होने के लिए रात को ही लखनऊ निकलना पड़ा ऐसे में परिवार में बहुत राड़ हो गई और कई ने बताया कि पार्टी के डर की वजह से वो करवा चौथ पर चन्द्रमा निकलने से पहले ही मजबूरी में लखनऊ के लिए रवाना हो गये।
इतना ही नहीं कुछ नेताओं ने बताया कि जो उन्हें सरकारी गनर मिले हुए थे उन्होंने भी साथ चलने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उनका त्योहार हैं, पुलिस विभाग में पत्नी भी तैनात है उनको अधिकारिक तौर पर पुलिस के बड़े अधिकारियों ने अवकाश दे दिया है इसलिए उन्हें जाना है। कुछ सुरक्षाकर्मी ऐसे थे जिनकी पत्नी हाउस वाइफ है वो भी इंतजार कर रही है उन्हें जाना है। लेकिन जिनकी सुरक्षा में ये गनर लगे थे कि कुछ नहीं जब हम भी जा रहे हैं तो आप भी चलो। कई नेताओं ने बताया कि भाजपा को कम से कम हिंदू त्योहारों का तो ख्याल रखना चाहिए। उनको इस बात का अहसास होना चाहिए कि त्योहार में परिवार के साथ रहना आवश्यक है और मीटिंग का समय भी सुबह ही रख दिया गया इसलिए लखनऊ से दूर रहने वालों को रात को ही निकलना पड़ा और इस तरह करवा चौथ का त्योहार पूरी तरह से नहीं मना पाये परिवार को समय ही नहीं दे पाये। वहीं कुछ बड़े नेताओं का कहना था कि भाजपा ने तो कार्यकर्ताओं को एक तरह से पैड वर्कर समझ लिया है। हर एक दिन बाद नये-नये कार्यक्रम हो रहे हैं। एक कार्यक्रम से कार्यकर्ता निपटता है तो दूसरे कार्यक्रम का फरमान आ जाता है और उससे निपटता है तो तीसरे का फरमान आ जाता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज की बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि वो गृहमंत्री के सामने ये मुद्दा उठाएंगे कि रोज कार्यकर्ताओं को अगर कार्यक्रम में ही लगा दिया जाएगा तो फिर वो आम जनता के बीच कैसे जाएंगे। हर दिन कोई ना कोई कार्यक्रम पार्टी का होता है किसी बड़े नेता का जन्मदिन होता है या फिर किसी बड़े नेता का आगमन होता है ऐसे में फिर संगठन के लोग या आम कार्यकर्ता कैसे जनता के बीच जाकर उनकी समस्या सुनेगा और उनके बीच रहेगा। इसलिए पार्टी को चाहिए कि कार्यक्रम कम बनाये और कार्यकर्ताओं को जनता के बीच ज्यादा समय बिताने को कहे ताकि फिर पार्टी के प्रति लोगों का क्या रूझान उसका भी अंदाजा हो जाए और लोगों को भी ये लगेगा कि उन्होंने जिस उम्मीद के साथ पार्टी को वोट दिया था कम से कम उसके कार्यकर्ता तो उनके बीच है।
बहरहाल, करवा चौथ को लेकर कई नेताओं के घर में जरूर राड़ हो गई और एक तरफ पाटी की मीटिंग और दूसरी तरफ पत्नी का व्रत इस असमंजस्य में नेता फंसे रहे और बड़े बुझे हुए दिल के साथ बैठक में पहुंचे गये।