विपक्ष और लोकतंत्र
विपक्ष इतना हताश है कि वो क्या बोल रहा है उसे कुछ समझ ही नहीं रहा है। हालांकि कांगे्रस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को जो लोग पप्पू कहकर सम्बोधित करते थे उनकी सोच जरूर बदली है और लोग अब कहने लगे हैं कि राहुल गांधी ही नरेंद्र मोदी का खुलकर मुकाबला कर रहे हैं बाकी सब घर बैठ गये। इसमें कोई दोराय नहीं जिस तरह से जेन-जी का दौर चला था और कॉकरोच जनता पार्टी ने धमाकेदार एंट्री की थी आज उसी कॉकरोच पार्टी को कुछ ही समय के अंदर हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया। दरअसल, नीट को लेकर एक युवा सडक़ों पर आया था उसी के कारण माहौल बना और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और मोदी सरकार को जेन-जी, जेन-जी कहना पड़ा लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे को लेकर जिस तरह से कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन विफल हुआ वो सबके सामने है और जो उम्मीद की किरण दिखाई दी थी फिलहाल वो अब दिखाई नहीं दे रही है। विपक्ष लोकतंत्र की दुहाई दे रहा है लेकिन लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया जिस तरह से अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है ऐसे में आपका कोई आंदोलन सफल हो जाए ऐसा संभव नहीं। भले ही सोशल मीडिया का जमाना हो लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर लोग आज भी भरोसा करते हैं। लेकिन मीडिया की खामोशी आंदोलन की विफलता रही है। जब से मीडिया घराने में धन कुबेरों की एंट्री हुई है उसके बाद देश के नामचीन पत्रकार घरों पर बैठ गये। क्योंकि उन्होंने गोदी मीडिया बनने से इनकार कर दिया। जाहिर है कि मीडिया की खामोशी अपने आप में बहुत बड़ी भूमिका इस समय देश में निभा रही है। विपक्ष कितना हताश है इसका अंदाजा उनके बयानों से लगाया जा सकता है। मुद्दों पर वो भी बात नहीं कर रहे हैं और व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। अब विपक्ष का यही कहना है कि मोदी को हराना आसान नहीं है और मोदी को एक ही व्यक्ति हरा सकता है और वो है खुद मोदी। जहां से लोग सोचना बंद कर देते हैं वहां से मोदी जी सोचते हैं अब ये सब स्वीकार करने लगे हैं। इतना बड़ा आंदोलन बीच में हुआ लेकिन मोदी जी की खामोशी रही। ये खामोशी भी किसी तुफान से कम नहीं है हो सकती है कि आने वाले दिनों में ये खामोशी टूटे और फिर कुछ नया फैसला सुनाई दे। जय हिंद