नेताओं के बिगड़े बोल
राजनीति में इतनी गिरावट आ गई है कि व्यक्तिगत तौर पर एक दूसरे के खिलाफ इस तरह के शब्दों का प्रयोग होता है जो आज से कई दशक पहले कभी राजनीति में नहीं होता था। स्व. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि राजनीति में कटूता की कोई जगह नहीं है और मतभेद हो सकते हैं मनभेद नहीं हो सकते। उन्होंने लोकसभा में कहा था कि वो पंडित जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ खूब बोलते थे लेकिन जब रात को किसी कार्यक्रम में पंडित नेहरू से मुलाकात होती थी तो वो हंसकर कहते थे कि आज बहुत अच्छा बोले। वाजपेयी जी कहते थे कि आज तो ऐसी राजनीति हो गई है कि अगर किसी के खिलाफ बोल दिया जाए तो दुश्मनी पक्की है। वास्तव में ये बात आजकल बिल्कुल सही बैठ रही है। २०१४ में देश में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पर भरोसा किया और प्रचंड बहुमत दिलाकर सरकार बनाई। २०१९ में नोटबंदी के बाद भी सरकार बनी। जबकि लोगों को लग रहा था कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी कराकर देश के लोगों को लाइन में लगा दिया अब सरकार बनना मुश्किल है लेकिन उसी जमाने में कांगे्रस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर का एक बयान आया उसने पूरा माहौल ही बदल दिया और फिर मोदी जी की सरकार बनी। एक बार नहीं कई बार कांगे्रस के नेताओं ने इस तरह की बयानबाजी की जिसको भाजपा ने चुनावी मुद्दा बना लिया और सरकार बन गई। दरअसल, चुनाव में अब जनहित के मुद्दे तो दूर की बात हो गये हैं अब कौन किसको ज्यादा अपशब्द कह दे कौन से नफरत भरे नारे चल जाए अब उसी पर ही चुनाव होता है। अब राजनीति की तस्वीर बिल्कुल बदल गई है। प्रधानमंत्री मोदी की मां को लेकर जिस तरह की शब्दावली इस्तेमाल की जाती है वो स्वीकार्य नहीं है। अब कांगे्रस के अध्यक्ष खडगे ने प्रधानमंत्री के बाप पर ही बयान दे दिया। खडगे ने कहा कि मोदी नहीं मोदी बाप भी जाएगा। ये कैसी शब्दावली है। ये कैसी भाषा इसे कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता, ये केवल बदहवासी और डिप्रेशन वाली भाषा है ये हताशा वाली भाषा है। इसे सभ्य समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। भाजपा ने इस करारा जवाब दिया है। चुनाव में या भाषणों में परिवार का जिक्र नहीं होना चाहिए। किसी की भी मां या बाप पर कोई टिप्पणी नहीं होना चाहिए। खडगे एक वरिष्ठ नेता है उनकी जुबान से ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। जय हिंद