ये क्या कह गये पूर्व मंत्री
मोदी सरकार को लेकर विपक्ष तो हमलावर है ही लेकिन उनके पुराने साथी भी अब ऐसे शब्द जबान से निकाल रहे हैं जो कभी पहले बोलते भी नहीं थे। केंद्र सरकार में मंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता ने सोशल मीडिया पर कहा कि जिस तरह के हालात देश में चल रहे हैं ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि २०१४ के बाद लोगों को बहुत उम्मीद थी कि अब कुछ बड़ा बदलाव होगा, लेकिन अब स्थिति ये है कि तीसरे क्रम में अब सत्ता तो बच गई है लेकिन मोदी सरकार का इकबाल पहले जैसा नहीं रहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना था कि लोग नोटबंदी को भी भूल गये, जबकि वो एक बहुत बड़ा कदम था। आम आदमी की कमर टूट गई, लोग लाइन में लग गये, लेकिन फिर भी २०१९ में सरकार वापस आ गई, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार ने सबक नहीं लिया और २०२४ में ४०० का दावा करने वाली भाजपा बैसाखी पर आ गई और दूसरे की बैसाखी पर केंद्र में सरकार है। पूर्व मंत्री का कहना था कि पहले कभी भी कोई प्रधानमंत्री को लेकर अशोभनीय भाषा का प्रयोग नहीं करता था, लेकिन आज जिस तरह की तस्वीर सामने आ रही हैं वो इस बात का सबूत है कि अब इकबाल खत्म हो गया। सत्ता जरूर बची हुई है। दरअसल, जिस तरह से मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है उसको लेकर भी अब अंदरखाने माहौल जरूर बन रहा है। राहुल गांधी का यह बयान दो सौ अफसर उनके संपर्क में हैं, ये हलका बयान नहीं है। इतना ही नहीं अफसरों के साथ भाजपा के कुछ वो बड़े नेता जो हाशिये पर हैं और जिनकी कोई पूछ नहीं हो रही है वो भी कहीं न कहीं अंदरखाने अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं और यही एक गंभीर और चिंता का विषय है। क्योंकि अगर घर का भेदी होता है तो फिर लंका बचना मुश्किल होती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री का बयान अपने आप में इस बात का संकेत है कि सत्ता भले ही चल रही है लेकिन पहले जैसी हनक अब नहीं है और जब इकबाल कम होता है तो फिर कुछ भी संभव है। क्योंकि जिसका इकबाल बुलंद होता है उसको आसानी से कोई हरा नहीं सकता। वैसे दिल्ली वालों की खामोशी भी किसी बड़े तुफान से कम नहीं है। राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चाओं पर भरोसा करें तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक धमाका हो या कोई ऐसा फैसला हो जो पूरा माहौल ही बदल दे और आज जो लोग कह रहे हैं कि स्थिति ठीक नहीं है वो फिर इस चौकाने वाले फैसले के मंथन में लग जाएं। क्योंकि दिल्ली वालों को भी अपनी जमीनी हकीकत का पता है, इसलिए वो भी खामोश जरूर हैं क्योंकि उनकी खामोशी के पीछे राज जरूर है।
जय हिन्द