कांगे्रस को लेने पड़े थे अपने फैसले वापस
कहते हैं कि जब कोई राजनीतिक दल सत्ता में होता है तो वो ऑटोमेटिक पावरफुल हो जाता है। लेकिन कांगे्रस भी २०१४ तक मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सत्ता में रही। दस साल तक केंद्र में कांगे्रस की सरकार रही लेकिन कितने डिसीजन हुए ये सभी के सामने है। लेकिन अगर भाजपा की बात की जाए तो वास्तव में उसमें डिसीजन लेने की पावर है। सरकार की बात छोड़ दें तो भाजपा हाईकमान के निर्णय भी इस बात का प्रमाण है कि भाजपा बोल्ड डिसीजन लेने में सभी दलों से आगे निकल गई है। देश में कई दशकों तक सत्ता में रहने वाली कांगे्रस के अंदर भी बोल्ड डिसीजन की पावर नहीं थी। हां, एक जमाने में जब संजय गांधी जिंदा थे तब कुछ बोल्ड डिसीजन हुए थे लेकिन उसका नुकसान भी हुआ था बाद में वो डिसीजन वापस भी लिये गये इतना ही नहीं शाह बानो केस में भी कांगे्रस को बैकफट पर आना पड़ा लेकिन जब से भाजपा की सरकार सत्ता में हैं तब से बोल्ड डिसीजन लिए गए और फिलहाल कोई डिसीजन वापस नहीं हुआ। ऐसा भी पहली बार हुआ कि 12 साल के शासन में पहली बार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ भाजपा हाईकमान जिस तरह से फैसले ले रही है वो सबके सामने है। कई दलों को मिलाकर एनडीए बना है लेकिन सारी पावर भाजपा के पास है। हरियाणा में हमेशा से जाट समुदाय का मुख्यमंत्री रहा। लेेकिन अब कई वर्षों से भाजपा ने इतिहास ही बदल दिया और नॉन जाट मुख्यमंत्री चला आ रहा है ये बोल्ड डिसीजन भी भाजपा ने लिया। राजस्थान, मध्यप्रदेश में जिस तरह पहली-पहली बार के विधायकों को मुख्यमंत्री बना दिया ये बोल्ड डिसीजन भी भाजपा ने लिया। जो अपने लिये मंत्रालय की सिफारिश कर रहे थे बड़े नेताओं से मिलने के लिए जो टाइम मांगते थे ऐसे विधायक को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा का राष्टï्रीय अध्यक्ष बना दिया। कोई सोच भी नहीं सकता था कि जो नितिन नबीन खुद सिफारिश के लिए नेताओं के यहां खड़े थे वही बड़े नेता उनके लिए बुके लेकर कतार में खड़े थे। ना संघ बोला और ना ही पार्टी के अंदर से कोई आवाज आयी कि ये क्या फैसला ले लिया। राज्यसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों की नाराज को नजरअंदाज करते हुए ना संजीव बालियान को उम्मीदवार बनाया ना सतपाल चौधरी को बनाया और ना ही जयंत चौधरी को यहां भी बोल्ड डिसीजन लिया गया। इसलिए कोई ये समझ ले कि भाजपा को अपनी शर्तों पर चला सकता है ये संभव नहीं है। अभी देखना होगा कि विधानसभा चुनाव 2027 में कैसे-कैसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर भाजपा हाईकमान जोर का झटका धीरे से देगा और फिर हर बार की तरह पार्टी के दिग्गज यही कहेंगे कि जो हाईकमान का फैसला होगा उसी को लड़ाएंगे। बहरहाल, भाजपा के बोल्ड डिसीजन के पीछे कई कारण क्योंकि सब खामोश हैं, जनता भी खामोश है, जनता की खामोशी के पीछे बस एक ही कारण है उसके पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है लेकिन वो दल ही क्या जो बोल्ड डिसीजन ना ले।
बना रहे थे जो किस्से मेरी तबाही के,
उन्हें खबर ही नहीं थी कि रूख बदल रही है हवा।।