वर्तमान में आप किसी से पूछ लीजिए कि सबसे ज्वलंत मुद्दा क्या है? जवाब एक ही आएगा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार। अगर यह कहा जाए कि राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी दलों की नींद एक ज्ञानेश कुमार के नाम से हराम है, तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। मेरा सवाल यह है कि अगर कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाना चाहते हैं, तो संवैधानिक तरीका क्यों नहीं अपनाते? क्या सडक़ पर लेट कर, पुलिकर्मियों से बहस करके, किसी भी तरह की बयानबाजी करके देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया जा सकता है? मेरे इस सवाल का जवाब कोई कांग्रेसी, या किसी दूसरे विपक्षी दल का नेता दे सकता है। अगर विपक्ष के पास तीन सौ सांसदों का समर्थन है तो क्यों मुख्य चुनाव आयुक्त के विरूद्घ महाभियोग नहीं लाया जा रहा। कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल धरने-प्रदर्शन से मांग पूरी करेंगे या संविधान के तरीके से। कुछ समय पहले तक राहुल गांधी खुद संविधान की प्रतिलिपि अपने हाथ में लिए घूमते थे। आज उसका पालन करने में उन्हें परेशानी क्या है? इसका एक उत्तर तो मेरी समझ में आ रहा है। वह ये है राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी नेता यह जानते हैं कि संविधान के हिसाब से ज्ञानेश कुमार सही काम कर रहे हैं। बोगस वोट मतदाता सूची से बाहर होने ही चाहिएं। मगर विपक्ष को तो जनता को बरगलाकर मीडिया का और लोगों का अटेंशन चाहिए बस। सडक़ पर लेट गए, फोटो करा ली, टीवी मीडिया पर न्यूज टेलिकास्ट हो गई, कुछ विरोधी देशों के लोगो ने प्रतिक्रिया दे दी, बस इनका काम खत्म। केवल अटेंशन पाना ही इनका एकमात्र उदे्दश्य रह गया है। लेकिन मेरी एक बात यह भी समझ लिजिएगा कि विपक्ष जितना विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का करेगा, ज्ञानेश कुमार उतने ही अधिक मजबूत होकर सामने आएंगे। कांग्रेस करीब चार दशक से बंगाल से, तीन दशक से उत्तर प्रदेश से और इससे कहीं अधिक समय से गुजरात से सत्ता से दूर है। तो क्या तब ईवीएम थी? क्या तब चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार थे? जनता आपको क्यों नहीं चुन रही है, इसका जवाब तलाशिए, उस पर पर्दा ना डालिए। बात एसआईआर के गलत सही की नहीं है, बात तो नियत की है।