चार वर्ष में एक बार आता है जयंती योग
नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। इस बार जन्माष्टïमी का पर्व चार सितम्बर को मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ योगों का संयोग हैं। इस दिन जयंती, सर्वार्थ सिद्घि, मित्र, त्रिग्रही, मानस योग एकसाथ हैं। जो वहीं चन्द्रमा का उदय रात 11.26 पर होगा। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र के आचार्य शिवकुमार शर्मा के अनुसार इस बार रोहिणी नक्षत्र का योग होने से यह जयंती योग बन गया है। रोहिणी नक्षत्र रात्रि 23.03 बजे समाप्त हो रहा है। किंतु अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र उदयकालीन और प्रदोष व्यापिनी होने से यह जयंती योग बन गया है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग, मित्र योग और शाम को रात्रि 11.30 बजे से गोचर में त्रिग्रही योग एवं मानस योग बन रहा है। इन शुभ योगों में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाना एक शुभ और पुण्यदायक योग है।
अब से पहले जयंती योग योग 2023 में पड़ा था। प्रत्येक तीन चार वर्षो में एक बार यह योग बनता है। उन्होंने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष में षष्ठी तिथि का क्षय हो गया है। इसलिए चंद्रमा थोड़ा पहले उदय होंगे।
शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म वृषभ लग्न में निशीथकाल में हुआ था। भगवान कृष्ण की जन्म के समय रात्रि 10.30 बजे से मध्य रात्रि 12.05 तक चंद्रमा उच्च राशि वृषभ में रहेंगे और स्थिर लग्न वृषभ लग्न रहेगा, जो भक्तों की मनोकामना को पूरा करेंगे। जैसे दिन में अभिजीत मुहूर्त का विशेष महत्व है जो बहुत ही पुण्यदाई मुहूर्त होता है । उसी प्रकार निशीथ काल में जन्माष्टमी और दीपावली पूजन का मध्य रात्रि अर्थात निशीथ काल बहुत ही उत्तम मुहूर्त होता है। इस अवधि में जन्माष्टमी और दीपावली पर्व का मानना बहुत शुभ होता है।
जन्मोत्सव के उपरांत बाल कृष्ण का पंचामृत आदि से विशेष स्नान, पूजन और विशिष्ट पदार्थों का भोग लगाया जाएगा। इस दिन प्रात:काल से ही भगवान कृष्ण का विशेष श्रृंगार करें। घर में पंचामृत आदि स्नान कराएं और विशेष पूजन सामग्रियों से पूजा करें। विशेष पूजा मध्य रात्रि को ही होगी।