कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस के यातायात विभाग ने सभी तैयारी करने के दावे किए थे। मगर अब यात्रा पूरी होने के बाद उसे अपनी तैयारी का आंकलन करने की जरूरत है। गाजियाबाद यातायात पुलिस ने पांच अगस्त से मेरठ रोड या डायवर्जन लागू करने की योजना बताई थी। मगर अचानक तीन अगस्त को ही यातायात डायवर्जन लागू कर दिया गया। इससे हजारों लोगों को परेशानी हुई। एक ही दिन में व्यवस्था ध्वस्त होती नजर आई। इसके बाद पुलिस ने कुछ व्यवस्था संभाली। लोगों की परेशानी कम हुई। लोगों ने राहत की सांस ली। धीरे-धीरे कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंची। नौ अगस्त को डीएमई पर नई व्यवस्था लागू की गई। मगर दस अगस्त की सुबह एनएच 9 पर जाम लग गया। हालात यह हो गए कि नोएडा, दिल्ली जाने वाले लोग भयंकर जाम में फंस गए। पन्द्रह मिनट की दूरी तय करने में घंटो लग गए। हजारों लोग सडक़ पर खड़े गाजियाबाद कमिश्नरेट के यातायात विभाग का इंतजार कर रहे थे। जाम से निकलने का कहीं कोई रास्ता नजर ही नहीं आ रहा था। एक बात और समझ नहीं आई कि कविनगर थाने से कलक्ट्रेट जाने के लिए हापुड़ चुंगी रेड लाइट पर लेफ्ट साइड का रास्ता बंद क्यों किया गया। जबकि इधर से कोई कांवडिय़ा आना ही नहीं था। लोगों को अपने वाहन लेकर रेड लाइट से कलक्ट्रेट की तरफ मुडऩा पड़ा। बताया जा रहा है कि ऐसा कई और चौराहों पर भी किया गया। गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस के यातायात विभाग को अपने ट्रैफिक प्लान को परखना चाहिए, उसे देखना चाहिए कि क्या वह अपने इस प्लान से संतुष्टï है। जांचना चाहिए कि त्रुटि कहां रह गई है, अगर रह गई है तो उसे दूर किया जाना चाहिए। क्योंकि सुधार की गुंजाइश तो हमेशा रहती है।