लोकसभा की कार्यवाही
२५ दिन से लोकसभा और राज्यसभा में जिस तरह हंगामा हुआ, उधर यूपी विधानसभा में तीन दिन चले सत्र में जिस तरह विपक्ष हंगामा करता रहा आखिरकार सदन क्यों नहीं चलने दिया जा रहा है? जनता के मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष क्यों गंभीर नहीं है? विपक्ष एक मुद्दे को लेकर २५ दिन से सदन में हंगामा कर रहा है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक शोर शराबा है। आखिरकार विपक्ष के पास क्या केवल एक ही मुद्दा है? ठीक है ये मुद्दा आस्था से जुड़ा है लेकिन इस पर राजनीति नहीं होना चाहिए। अफसोस इस बात का है कि हमारे देश की राजनीति धर्म और आस्था के आसपास ही रह गई है। जाति और धर्म के आधार पर ही अब राजनीति हो रही है। विपक्ष को चाहिए सरकार से जनहित के मुद्दे को लेकर जवाबदेही तय करे। जनता ने जिस उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधि बनाकर लोकसभा और विधानसभा में भेजा है विपक्ष भी अपनी जिम्मेदारी निभाए। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के अलावा कई और भी गंभीर मुद्दे हैं। लेकिन अफसोस इस बात का है कि चढ़ावा चोरी को लेकर जिस तरह की तस्वीरें सामने आ रही है वो भी अच्छी राजनीति की तस्वीर पेश नहीं कर रही है। सांसद पप्पू यादव ने जिस तरह साधू के भेष में प्रदर्शन किया, चढ़ावा चोरी को लेकर जिस तरह का प्रदर्शन किया वो राजनीति में सबसे बड़ी गिरावट है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी में किसी भी साधू संत का कोई हाथ नहीं रहा फिर साधू-संतों को क्यों बदनाम किया जा रहा है। ये स्वीकार्य नहीं है। राजनीति हो जनहित के मुद्दों को लेकर हो, लोकसभा और विधानसभा में विपक्ष जनहित के मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद करे तब एक अच्छा मैसेज जाएगा। सदन नहीं चलने देने वाले जनप्रतिनिधि ये जानते हैं कि जो करोड़ों रुपया खर्च सदन की कार्यवाही पर आता है वो जनता के टैक्स से ही अदा होता है। जनप्रतिनिधियों को ये भी सोचना चाहिए कि माननीय का दर्जा जनता ने ही दिया है। इसलिए जनता के मुद्दों को सर्वोपरि रखे और व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति नहीं करे। सरकार की जिम्मेदारी है कि वो सभी को विश्वास में लेकर आगे बढ़े क्योंकि विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वो जनता की उम्मीदों पर खरी उतरे। बहरहाल, धर्म और जाति की राजनीति केवल आपस में दूरियां ही पैदा कर रही हैं और जनहित के मुद्दे साइड में रह जाते हैं। जय हिंद