चढ़ावा चोरी के अलावा भी कई समस्याएं हैं
संसद से लेकर यूपी विधानसभा तक चढ़ावा चोरी को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है लेकिन विपक्ष को ये बात समझना चाहिए कि चढ़ावा चोरी के अलावा भी कई और गंभीर मुद्दे हैं, समस्याएं हैं जिन पर चर्चा होना चाहिए। जनता भी विपक्ष के इस रवैये से खुश नहीं है। ठीक है चढ़ावा चोरी का मामला गंभीर है लेकिन सरकार की ओर से एसआईटी बना दी गई, गिरफ्तारियां हो रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है जब सबकुछ विचाराधीन है ऐसे में एक मुद्दे को लेकर लगातार हंगामा करना कहां तक ठीक है। इससे यही लगता है कि विपक्ष के पास भी कोई मुद्दा नहीं है और यदि मुद्दे हैं भी तो वो उठाना नहीं चाह रहे हैं। केवल सदन में आकर होहल्ला करके अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। महंगाई का मुद्दा है, ई-20 का मुद्दा है, रसोई गैस के दाम बढ़ रहे हैं, कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, कई और भी ऐसी गंभीर समस्याएं है जिन पर सरकार को आगाह करने की जिम्मेदारी विपक्ष की है। लेकिन पिछले 25 दिन से एक ही मुद्दे को लेकर संसद नहीं चलने दी जा रही है। तीन दिन से यूपी विधानसभा में काम नहीं हो रहा है और इस तरह समय ही बर्बाद नहीं हो रहा है बल्कि जनता के टैक्स का पैसा भी बर्बाद हो रहा है। यूपी विधानसभा के चुनाव अगले साल होना है और अब कम ही समय बच रहा है ऐसे में जो गंभीर समस्याएं इस समय है उनको लेकर चर्चा करनी चाहिए। लोकसभा और राज्यसभा की तस्वीर भी यही है। ऐसा लगता है जैसे विपक्षी सांसद केवल आउटिंग करने के लिए सदन आ रहे हैं। कोई साधू के भेष में आ रहा है, कोई दानपात्र लेकर आ रहा है, कोई दानपात्र लूट रहा है एक अजीब मजाक बना रखा है। सत्ता पक्ष खुद अपनी जवाबदेही से जहां कतरा रहा है वहीं विपक्ष भी एक मुद्दे को लेकर केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। जरूरत इस बात की है कि जनहित के मुद्दे को लेकर विपक्ष सदन चलने देना चाहिए ताकि सरकार भी जवाबदेही के लिए सदन में आये। यही कारण है कि लोकसभा चलते हुए इतना समय हो गया है, ना प्रधानमंत्री आ रहे है और ना ही गृहमंत्री और इस तरह करोड़ों रुपए खर्च होकर सदन की कार्रवाई स्थगित होती रहेगी। मुद्दे अपनी जगह रहेंगे और सदन फिर अनिश्चितकाल के स्थगित हो जाएगा। जय हिंद