इमरान प्रतापगढ़ी पहले शायर थे अब कांग्रेस के राज्य सभा सांसद हैं। एक समय अतीक अहमद के मंच पर नजर आकर भी प्रसिद्घि पा चुके हैं। अगर लगता है कि कहीं कुछ ऐसा हो रहा है जिससे किसी वर्ग विशेष की सुरक्षा पर सवाल है, या किसी की भावनाएं आहत हो रही हैं, तो एक राज्यसभा सांसद होने के नाते उन्हें कानून का सहारा लेना चाहिए था। हालांकि आम नागरिक को भी यही करना चाहिए था। मगर सांसद होने के नाते आपकी जिम्मेदारी अधिक हो जाती है। राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कथित रूप से गाजियाबाद के डासना मंदिर में हुए एक कार्यक्रम की वीडियो क्लिप एक्स पर पोस्ट कर दी। जिसमें उन्होंने लिखा कि प्रिय गाजियाबाद पुलिस इस तरह पूरे समुदाय के नरसंहार के लिए खुलेआम भड़काने की घटना तो आतंकवाद की श्रेणी में आती है। रासुका, यूपीपीए जैसी धाराएं भी कम हैं ऐसे लोगों के लिए। उम्मीद है आप संविधान सम्मत काम करेंगे। उनकी इस पोस्ट पर दोनों समुदायों के लोग और खासकर युवा अपनी टिप्पणी देने लगे। कुछ ने खोड़ा में ईद पर कुर्बानी दिखाने की बात पर हुई सूर्या की हत्या की दुहाई दे दी। अब हुआ क्या मुस्लिम पक्ष खुलकर प्रतापगढ़ी की भाषा बोलने लगा और हिन्दु पक्ष अपने तर्क लेकर आ गया। दोनों तरफ से एक दूसरे के खिलाफ जहस उगला जाने लगा। अलग अलग घटनाओं के जिक्र करके एक दूसरे को नीचा दिखाया जाने लगा। ऐसी ऐसी बातें कही गई कि लोग बर्दाश्त ही नहीं कर पाएं। महाकाली वाहिनी की संरक्षक डाक्टर उदिता त्यागी भी मैदान में आईं। उन्होंने लिखा इनका इकलौता काम पागल लोगों को पीछे छोडऩा है। पहले भी डासना मंदिर पर भीड़ ने हमारी हत्या की सजिश की थी। अब फिर वही कर रहे हो। कुछ लोगों ने सवाल भी पूछा कि आप राज्यसभा सांसद हैं आप कानून सम्मत कार्य करें और पुलिस को लिखित शिकायत करें, पुलिस अपना काम करेगी। इस तरह सोशल प्लेटफार्म पर भड़काऊ बात करने की तो कोई जरूरत ही नहीं थी। कुछ लोगोंं ने टिप्पणी की है कि इनका मकसद कानूनी कार्रवाई का है ही नहीं, इन्हें तो समाज में द्वेष फैलाना है। हालांकि गाजियाबाद पुलिस ने जांच की बात कह दी है।