भगवान श्रीराम के चढ़ावे को लेकर बड़ी राजनीति चल रही है। आम आदमी पार्टी के सांसद डॉ. संजय सिंह ने कल अयोध्या में जमीन घोटाले को लेकर 13 बिंदुओं के मामले में 11 दस्तावेज एसआईटी अध्यक्ष को सौंपे। इसमें जमीन घोटाले की चर्चा ज्यादा है। वहीं राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर विपक्ष काफी हमलावर है। विपक्ष को लेकर मुझे राहत इंदौरी साहब का एक शेर याद आता है कि
‘झूठों ने झूठों से कहा सच बोलो,
सरकारी ऐलान हुआ है सच बोलो।
घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाले पर लिखा है सच बोलो।।Ó
राजनीति करने के लिए और भी बहुत मुद्दे हैं लेकिन अफसोस ये है कि वो लोग राजनीति कर रहे हैं जो कभी अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन करने ही नहीं गये। ये ठीक है कि करोड़ों लोगों की आस्थाएं राम मंदिर से जुड़ी हैं। जो घटना हुई है वो वास्तव में ठीक नहीं हुई है। एक तरह से सीधे तौर पर जिन लोगों ने भी ये घटना की है आस्था पर प्रहार किया है। इसको राजनीतिक चश्मे से ना देखें। वास्तव में जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं उन्हें नैतिकता के आधार पर जांच के चलते हुए ही इस्तीफा दे देना चाहिए। श्रीश्री 1008 जगदगुरु श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् का ये बयान अपने आप में काफी अहमियत रखत है कि नैतिकता के आधार पर राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी ट्रस्टियों को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका कहना है कि सपा और कांगे्रस जो हमेशा राम विरोधी रही है आज उसे भगवान राम का चढ़ावा याद आ रहा है। फिर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम् आगे कहते हैं कि चोरों की बात को भी मान लिया जाना चाहिए। अगर सब चोर कह रहे हैं कि चोरी हुई तो फिर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बात एक चोरी तक सीमित नहीं है बात आस्था से जुड़ी है। भगवान श्री राम के जीवन से जुड़ी है। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम इसलिए कहा जाता है कि एक सवाल उठने पर माता जानकी को वन में भेज दिया था। आज हजारों सवाल उठ रहे हैं इसलिए जो लोग भी वहां जुड़े हुए हैं उन्हें भगवान श्रीराम के जीवन को ध्यान में रखते हुए तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने एफआईआर और गिरफ्तारी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार भी व्यक्त किया है। जय हिंद