मौलाना रशीदी का बयान
मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रा को लेकर जो बयान दिया है वो वास्तव में निंदनीय है। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। आखिरकार मौलाना को किसने इजाजत दी कि वो किसी की आस्था के साथ खिलवाड़ करे। मौलाना को अपने बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगना चाहिए। उनको ये किसने अधिकार दे दिया कि कांवड़ लाने वाला व्यक्ति आतंकी है और कांवड़ यात्रा पर ही उन्होंने सवाल खड़े कर दिये। हालांकि हिंदू संगठनों ने साजिद रशीदी के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराये हैं। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ जो आपस में एक दूसरे के प्रति नफरत फैलाने की कोशिश करता हो चाहे वो किसी भी धर्म या जाति को हो उसके समाज के लोगों को चाहिए कि ऐसे व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करे। सुर्खियों में बने रहने के लिए और पब्लिसिटी पाने के लिए जो लोग धर्म और जाति के नाम पर जहर खोलने का काम कर रहे हैं ऐसे लोगों के खिलाफ जब तक उनके समाज के लोग ही आवाज बुलंद नहीं करेंगे ये लोग अपनी हरकतें करते रहेंगे। कांवड़ जातियों की तपस्या को किसी ने नहीं देखा। किस तरह शिव भक्त तपस्या में लीन होकर धूप, पानी में कांवड़ लेकर आते हैं ऐसे लोगों को आतंकी कहने की किसी को भी छूट नहीं दी जा सकती। ऐसे बयानों पर शर्म आना चाहिए। कांवड़ यात्रा पर सवाल उठाना सीधा-सीधा आस्था पर सवाल है और आस्था पर प्रहार करने वालों के खिलाफ कानून तो कार्रवाई करेगी ही समाज के लोगों को भी अपने स्तर पर ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज उठाना चाहिए ताकि फिर कोई भी आस्था पर प्रहार नहीं करेगा। सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। साजिद रशीदी ने इस तरह की बयानबाजी की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई और एक बार फिर उसने आस्था पर प्रहार किया है। दरअसल, अफसोस इस बात का है कि हर व्यक्ति चाहे उसे अपने धर्म के बारे में कोई जानकारी ना हो वो चैनल पर बैठकर धर्मगुरु बन जाता है। चैनल वाले भी उसके नाम के आगे धर्मगुरु लिखते हैं जबकि वास्तव में किसी भी धर्म का कोई गुरु होगा जो किसी के खिलाफ नफरत की बात नहीं करेगा और ना ही आस्था पर प्रहार करेगा। चंद रुपयों के लालच में चैनल पर बैठ जाते हैं और धर्मगुरु बन जाते हैं।
जय हिंद