राम मंदिर चढ़ावा चोरी
भगवान श्रीराम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर जिस तरह की खबरें आ रही हैं, छोटी मछलियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब इस्तीफे भी शुरू हो गये हैं। सबसे महत्वपूर्ण इस्तीफा चंपत राय जी का हुआ है। उसके बाद उन्हीं के साथ अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है। अभी कई और इस्तीफे आना है। दरअसल, जिस तरह की बयानबाजी अयोध्या को लेकर की जा रही है और दिल्ली में बैठे लोग कांटे से कांटा निकलाने का प्रयास कर रहे हैं उसकी शुरूआत हो गई है। चढ़ावा चोरी होना एक बड़ा अपराध है लेकिन यहां इसके पीछे और भी बड़ी कहानी है। दरअसल, अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण के बाद से ही यहां पर पूरी तरह से संघ का कब्जा है। चंपत राय पहले दिन से ही सभी को खटक रहे थे। दरअसल, वो बेबाक इंसान है और वो अपनी ही चलाते हैं। इस बीच जो कहानियां २०२१ के बाद से उनके खिलाफ तैयार की गई थी, ७ जून २०२६ को वो कहानियां बड़ी फिल्म के रूप में सामने आ गई। पर्दे के पीछे कुछ ऐसे लोग भी है जिन्होंने कुछ विपक्ष के नेताओं को दस्तावेज के तौर पर अहम सबूत भी उपलब्ध कराये थे, ऐसी भी चर्चा है। क्योंकि सबसे पहले विपक्ष की ओर से ही जमीन घोटाले का मामला और फिर चढ़ावा चोरी का मामला उठाया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात और भगवान श्रीराम मंदिर के मुख्य ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्रा जब पिछले सप्ताह अयोध्या आये थे और उन्होंने चोरी चढ़ावे पर जो बयान मीडिया में दिये थे तभी से ही चर्चाएं शुरू हो गई थी कि अब चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और गिरिजी महाराज इनके बुरे दिन शुरू होने वाले हैं। ये बात सही है कि इनकी मौजूदगी में बहुत बड़ी घटना चोरी चढ़ावे की हुई है। ये अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते क्योंकि जो गिरफ्तार हुआ है टिन्नू यादव वो चंपत राय का ड्राइवर है, एक भतीजा अनिल मिश्रा का है तो भले ही इनको जानकारी ना हो लेकिन जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। फिर 19 दिन तक एफआईआर नहीं कराई गई हालांकि सूत्र ये बताते हैं कि चंपत राय एफआईआर कराना चाहते थे लेकिन लखनऊ से कोई फोन आया उसके बाद वे शांत हो गये। हालांकि विपक्ष इसमें अपनी राजनीति चमका रहा है लेकिन पर्दे के पीछे यही है कि जो ये घटना हुई है अब इसका सहारा लेकर संघ का जो वर्चस्व अयोध्या में था उसे कम किया जाएगा और बहुत जल्द राम मंदिर में सीईओ की तैनाती हो सकती है। जय हिंद