गाजियाबाद में कई ऐसे स्थान हैं जो प्रशासनिक, सामाजिक, धार्मिक, खेल और राजनीतिक गतिविधियों की दृष्टिï से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर भवन, उत्तरांचल व पूर्वांचल भवन, पंडित दीन दयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, हिन्दी भवन, अग्रसेन भवन, चौधरी भवन, घंटाघर और कविनगर रामलीला मैदान आदि हैं। घंटाघर रामलीला मैदान मेें भी एक भवन बना है जिसका प्रयोग लोग अपने सामाजिक आयोजनों के लिए कर लेते हैं। इसी तरह कविनगर रामलीला मैदान में जानकी भवन नाम से आधुनिक सुविधाओं से युक्त इमारत भी है। यहां भी अनेक प्रशासनिक, राजनीतिक, सामाजिक कार्यक्रम होते रहे हैं। पूरा गाजियाबाद जानता है कि अंबेडकर रोड पर जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र है। यह मैदान खेल संबंधी गतिविधियों का एक बड़ा केन्द्र है। जैसा कि मैंने कल भी लिखा था कि इस मैदान पर अभ्यास करके अनेक बच्चे कुशल क्रिकेटर बन चुके हैं। मगर परिस्थिति कुछ ऐसी हुई कि आज कविनगर रामलीला कमेटी का जानकी भवन और जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र दोनों ही विवादों में हैं। दोनों संस्थाओं की संपत्ति पर कुछ लोगों की नजर है, ऐसा कहा जा रहा है। यदि इसमें कुछ भी सत्यता है तो यह शहर के लिए बहुत गलत है। खेल संबंधी गतिविधियों के लिए जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र बहुत आवाश्यक है तो सामाजिक गतिविधियों के लिए कविनगर रामलीला मैदान स्थित जानकी भवन भी जरूरी है। इसका संचालन कौन करता है, इससे याहर की जनता को कोई मतलब नहीं है। जनता को मतलब केवल इस बात से है कि दोनों का अस्तित्व बचा रहना चाहिए। जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र के खेल के मैदान पर ना तो हेलिपैड बनना चाहिए ना कोई अन्य स्थाई निर्माण ही होना चाहिए। वहां खेल का मैदान है तो खेल का मैदान ही रहना भी चाहिए। गाजियाबाद के प्रशासन, जीडीए आदि को वहां किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति देनी ही नहीं चाहिए। यदि कोई ऐसा प्रयास करता है तो उसके विरूद्घ कड़ी कार्रवाई भी होना चाहिए।