समाजवादी पार्टी में एक लंबे समय तक एक ही जनरेशन का दबदबा रहा। अब उस जनरेशन के अधिकतर नेता अधिक उम्र के कारण घर बैठ चुके हैं। उनके सामने जो दूसरी जनरेशन खड़ी हो चुकी थी, उसने भी खूब सत्ता सुख भोगा और अब पार्टी का काम करने से संकुचाते हैं। इस दूसरी जनरेशन के कई नेता अभी भी पदाधिकारी हैं। अब समाजवादी पार्टी की तीसरी जनरेशन मैदान में है। इस जनरेशन में अभी उत्साह भी है, उम्मीद भी है और जज्बा भी है। इस जनरेशन में गाजियाबाद से अभिषेक गर्ग, फैजल हुसैन, श्रवण कुमार, मनीषा त्यागी, नितिन त्यागी आदि नाम लिए जा सकते हैं। सभी ऊर्जावान हैं, जनसेवा को तत्पर हैं, कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति भी रखते हैं। इस जनरेशन ने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करके गाजियाबाद की राजनीति में अपनी पहचान बनाई है। इस जनरेशन ने तब सपा का झंडा उठाए रखा जब हर तरफ भाजपा की ही गूंज थी। इसलिए भी इस जनरेशन के लोगों के संघर्ष को सम्मान मिलना चाहिए। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव यदि चाहें तो इनको कुछ अधिक मौके दे सकते हैं। क्योंकि ये भविष्य के नेता हैं, आने वाला समय इनका हो सकता है। बस सपा प्रमुख को इन पर विश्वास दिखाना होगा। वैसे भी आने वाला राजनीतिक समय युवाओं का ही है। अखिलेश के साथ जितने युवा जुड़ेंगेउतना ही लाभ उन्हें आने वाले चुनाव में मिलेगा। इस जनरेशन के हुनर को आप दरकिनार नहीं कर सकते। क्योंकि इनके पास पूर्व नेताओं का अनुभव भी है तो भविष्य की असीम संभावनाएं भी हैं। यह लोग युवाओं के बीच जाकर अपनी बात मजबूती से रखना जानते हैं। धारा के विपरीत चलकर इन्होंने खुद को तपाया है। अब उस तप का फल मिलने का समय आ गया है। अगर अब भी इन्हें मौका नहीं मिला तो समय हाथ से निकल जाएगा। पांच वर्ष का समय बहुत लंबा होता है। पांच साल में राजनीति भी बदल जाती है और मतदाताओं की सोच भी। समय को पहचान कर उसके अनुसार काम करने वाले ही जीत प्राप्त कर लेते हैं।