धीरे से हुआ सवाल पहुंचा दूर तक
कहते हैं कि जब किसी को कोई बात अगर बड़े स्तर पर पहुंचाना है तो छोटी सी सुगबुगाहट भी अपना काम कर देती है। कुछ ऐसा ही शनिवार को हुआ। दरअसल, नेहरू युवा केंद्र और उसमें हो रहे निर्माण तथा कई सौ करोड़ की भूमि को लेकर पूर्व सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर काफी सक्रिय हैं। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण या उस पर अवैध गतिविधियां नहीं की जा सकती। इस संबंध में जीडीए से लेकर ऊपर तक वो शिकायत कर चुके हैं। तीसरी आंख ने देखा कि शनिवार को प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह पूर्व सांसद के निवास पर पहुंचे। यहां पर उनका आगमन पूरी तरह से निजी था और संगठन के भी लोग वहां नहीं थे। प्रभारी मंत्री के आगमन के बाद कोई भी चर्चा राजनीतिक नहीं हुई पुरानी यादें एक दूसरे से बांटते रहे। पूर्व भाजपा महानगर अध्यक्ष विजय मोहन ने बताया कि किस तरह उन्होंने धर्मपाल सिंह के लिए अध्यक्ष का जब नाम चल रहा था तो कितना प्रयास किया। किसी ने बताया कि लोध बिरादरी में धर्मपाल सिंह का कितना बड़ा कद है। जब नाश्ता आया तो हलवाईयों का जिक्र शुरू हो गया और किसका कलाकंद अच्छा है और किसकी बालूशाही अच्छी है किसका मिल्क केक अच्छा है मतलब बड़े राजनेता जो वहां मौजूद थे चर्चा करते रहे लेकिन इस बीच नेहरू युवा केंद्र को लेकर एक हल्की सी सुगबुगाहट शुरू हुई बस फिर पूर्व महानगर अध्यक्ष विजय मोहन ने पूरी जानकारी प्रभारी मंत्री को दे दी। वहां मौजूद अन्य भाजपा नेताओं ने नेहरू युवा केंद्र की भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर प्रभारी मंत्री को जानकारी दी। एक ने बताया कि 72 बीघा जमीन जबकि वहां एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया कि जबकि 16 बीघा जमीन नेहरू युवा केंद्र के पास है। वहीं कई नेताओं ने नेहरू युवा केंद्र की जमीन की कीमत कई सौ करोड़ बताई। बीच मार्किट में लाखों रुपए गज के हिसाब से जमीन की कीमत बताई गई। कुल मिलाकर मंत्री जी के दिमाग में पूरी तरह से नेहरू युवा केंद्र और उसमें चल रही गतिविधियां उतार दी गई। प्रभारी मंत्री ने कहा कि सारे दस्तावेज लेकर लखनऊ आने की बात कहीं गई। बहरहाल, बातों-बातों में शुरू हुई सुगबुगाहट लखनऊ तक पहुंच गई। अब देखना है कि इस पर कोई कार्रवाई होगी या फिर नाश्ते तक ही सीमित रहेगी। जय हिंद