विधानसभा चुनाव २०२७
डेढ़ साल पहले भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सर्वे कराया था। उसमें जो रिपोर्ट आयी थी उसको लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही थी। अब जुलाई के प्रथम सप्ताह से भाजपा हाईकमान ने प्राइवेट एजेंसियों से तीन स्तरीय गोपनीय सर्वे शुरू कराया है। इसमें वर्तमान जनप्रतिनिधि का क्षेत्र में क्या प्रभाव है, जनता इनसे कितनी खुश है और क्या राय रखती है। हर विधानसभा में संभावित तीन नामों को लेकर भी सर्वे हो रहा है। ये वो नाम है जो पार्टी हाईकमान ने खुद तय किये हैं। कुछ मीडिया रिपोट्स के आधार पर, कुछ अपने सूत्रों से। हालांकि इसमें कोई भी दावेदार नहीं है। लेकिन हाईकमान एक विकल्प के रूप में मजबूत दावेदार की भी तलाश कर रहा है। इसके अलावा चढ़ावा चोरी को लेकर आम लोगों में भाजपा के प्रति क्या राय है इसका भी सर्वे हो रहा है। इतना ही नहीं यूपी सरकार की कार्यप्रणाली से लोग कितने खुश हंै या ना खुश है इसका भी सर्वे हो रहा है। इस तरह तीन स्तरीय सर्वे गोपनीय रूप से चल रहे हैं। आम लोगों के बीच चर्चाओं में सर्वे करने वाले अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ये सर्वे पूरे उत्तर प्रदेश में कराया जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खासकर इस बार भाजपा हाईकमान की नजर है क्योंकि लोकसभा चुनाव २०२४ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को करारा झटका लगा है। गाजियाबाद, मेरठ, अलीगढ़, गौतमबुद्घनगर को छोड़ दें तो पश्चिम के कई मजबूत जिलों में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। इसलिए ये गोपनीय सर्वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत ही गहराई के साथ किया जा रहा है। दरअसल, विधानसभा चुनाव 2027 भाजपा के लिए भी बहुत अहम है। साथ सपा के लिए भी ये अग्निपरीक्षा है अगर इस बार सपा सरकार में नहीं आयी तो फिर एक लंबी लकीर खिंच जाएगी और कार्यकर्ताओं का उत्साह और मनोबल टूट जाएगा। वहीं भाजपा की हार भी लोकसभा चुनाव २०२9 की भी तस्वीर स्पष्टï कर देगी। इसलिए सभी दल अपने स्तर पर बहुत ही फूंक-फूंककर उम्मीदवारों का चयन करेंगे क्योंकि कभी-कभी उम्मीदवारों के चयन में जल्दबाजी परिणाम पलट देती है। जय हिंद