प्रधान का इस्तीफा
महान हिंदी कवि दुष्यंत कुमार की एक बहुत ही प्रेरणादायक ग़ज़ल है इस $गज़ल का बहुत ही मशहूर शेर है-कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारो।। दिल्ली में कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल 12 साल में पहली बार सरकार को झुकना पड़ा। भाजपा में कहावत है कि इसमें इस्तीफे नहीं होते, लेकिन ये कहावत भी अब गुजरे जमाने की बात हो गई। 12 साल से एक सोच बन गई थी कितना भी दबाव बना लो सरकार पर कोई असर नहीं पड़ता। ऐसा था भी, किसानों का आंदोलन सभी के सामने है। लेकिन युवा शक्ति के आगे सबकुछ धराशाही हो गया। शिक्षा मंत्री प्रधान का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि कहीं ना कहीं सरकार को जो रिपोर्ट्स मिली थी उससे सरकार घबरा गई थी और ना चाहते हुए भी इस्तीफा हुआ। भले ही पार्टी की तरफ से कहा जा रहा है कि युवा शक्ति का सम्मान किया लेकिन जब किसी सरकार का मंत्री दबाव में इस्तीफा देता है तो निसंदेह सरकार की छवि पर फर्क पड़ता है। जंतर-मंतर पर जिस तरह की तस्वीरें दिखाई, जिस तरह की भाषा का प्रयोग हुआ उसे भी सही नहीं ठहराया जा सकता। जिस तरह युवाओं ने अब छात्र थे या नहीं थे ये जांच का विषय है लेकिन जिस तरह उन्होंने अश्लीलता के साथ रीले बनार्ई, बयानबाजी की, सभ्य समाज उसे सही नहीं ठहरा सकता। जिस युवा पीढ़ी पर देश का भविष्य है अगर उसकी ये अशोभनीय भाषा होगी तो कौन स्वीकार करेगा। छात्रों की मांग सरकार ने मानी, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ, युवा शक्ति का अहसास हुआ लेकिन जिस तरह रील्स में भाषा दिखाई दे रही है, कम उम्र लडक़े-लड़कियां जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं वो ठीक नहीं है और सीजेपी के नेता जो अपनी कामयाबी पर जश्न मना रहे हैं उन्हें ऐसे लोगों से परहेज करना चाहिए और कम से कम जो लोग इस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं उनका बायकाट भी करना चाहिए। बहरहाल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद देश में राजनीति की एक नई इबारत लिखी गई है। अब लोगों को सीजेपी से बड़ी उम्मीद है। अब अगर कहीं कोई अत्याचार और जुर्म होगा तो सीजेपी की मांग उठेगी क्योंकि देश की राजनीति उस हवा की ओर चली जाती है जिधर सबका रूख होता है। एक सप्ताह पहले जिस सीजेपी को लोग निशाने पर ले रहे थे आज वही सीजेपी उनके लिए एक उम्मीद की किरण भी है। जीत के जश्न में सीजेपी को भी बहुत ध्यान से आगे बढऩा होगा। बहरहाल, 12 साल बाद एक नई उम्मीद की किरण ऐसे लोगों को दिखाई दे रही है जो ये कहते थे कि सरकार झुकने वाली नहीं है, कुछ कर लो ये ईवीएम के सहारे फिर सरकार बना लेंगे लेकिन प्रधान के इस्तीफे के बाद दुष्यंत कुमार का जो शेर सही साबित हो रहा है एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारो।। जय हिंद