केंद्र सरकार का फैसला सराहनीय
केंद्र में मोदी की सरकार बनने के बाद सबसे पहले उनका जो फैसला आया वो वीआईपी कल्चर को लेकर आया। उसमें मंत्रियों की गाडिय़ों से लाल बत्ती हटा दी गई और हूटर भी हटा दिये गये। ये अच्छा फैसला रहा। हालांकि काफिला कम नहीं हुआ। अभी बीच में ईरान और अमेरिकी युद्घ के दौरान तेल की किल्लत के चलते केंद्र सरकार ने अपने मंत्रियों के काफिले में कटौती की और प्रदेशों ने भी उस पर अमल किया। लेकिन यह सब कुछ ही दिन चला और आज स्थिति ये है कि मंत्री भी उसी तरह कारों के काफिलों से आ रहे हैं, कोई बड़ा नेता आ रहा है तो 40 से 50 गाडिय़ां साथ चल रही हैं। कोई भी अमल नहीं है, घंटों जाम में लोग फंस रहे हैं, वीआईपी मूमेंट के दौरान आम जनता को रोक दिया जाता है और फिर काफिले में एम्बुलेंस भी फंस जाती है लेकिन नेताजी को सुरक्षित निकलना पुलिस के लिए सर्वोपरि होता है चाहे एम्बुलेंस में मरीज इन काफिलों के चक्कर में अपनी जान क्यों ना खो दे। इस सिस्टम को बदलना बहुत जरूरी है। बहरहाल, केंद्र सरकार ने जो एक और फैसला आज लिया है एक अफसर एक गाड़ी वाला वो सराहनीय है। अगर निजी जीवन में भी इसी तरह का फॉर्मूला लागू हो जाए तो काफी हद तक खर्चों में कमी भी आ सकती है और सडक़ों पर गाडिय़ों का हुजूम भी कम हो सकता है। रिहायशी इलाकों में भी पार्किंग को लेकर जो बहस होती है, झगड़े होते हैं उन पर भी अंकुश लगेगा। दरअसल आज स्थिति ये है कि घर में कार चलाने वाले दो लोग हैं और गाडिय़ां छह-छह हैं। इससे गाड़ी खड़ी करने में भी परेशानी है, आर्थिक बोझ भी है और एक दूसरे में हिरस भी है। इसलिए अगर निजी जीवन में भी लोग ये फाूर्मला अपना लें कि अगर घर में दो लोग है और गाड़ी चलाने वाला एक है तो फिर पार्किंग का झंझट भी नहीं होगा और सडक़ पर बोझ भी कम होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार ने जो फैसला लिया है अफसर उस पर अमल करेंगे और निजी जीवन में भी लोग इस फॉर्मूले को अपनाएंगे। जय हिंद