हाउस टैक्स का मामला
गाजियाबाद (युग करवट)। हाउस टैक्स को लेकर भाजपा के अंदर खूब राजनीति चल रही है। सब जनप्रतिनिधि अपने-अपने तरीके से बयानबाजी कर रहे हैं। लेकिन अगर जमीनी तौर पर देखा जाए तो महापौर सुनीता दयाल बढ़े हुए हाउस टैक्स को लेकर खुलकर जनता के साथ पहले दिन से ही खड़ी नजर आ रही हैं। हैरत की बात ये है कि आज कुछ पार्षद और जनप्रतिनिधि बढ़े हुए टैक्स को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं लेकिन जब २०२४ में बढ़ा हुआ प्रस्ताव लाया गया था और पास हुआ था तब सब खामोश क्यों रह गये थे।
मेयर सुनीता दयाल ने बोर्ड की आपात बैठक बुलाकर बढ़े हुए प्रस्ताव को रद्द कराया था लेकिन मामला हाईकोर्ट में चला गया तो वो चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाये। हालांकि इस बीच उन्होंने लगातार जनता से बढ़ा हुआ टैक्स ना देने की अपील भी की थी। इसके अलावा उन्होंने एक बार नहीं कई बार 20 प्रतिशत टैक्स में छूट का भी ऐलान किया। हालांकि इसको लेकर भी कुछ लोगों ने राजनीति की लेकिन वो लगातार 20 प्रतिशत छूट की समयसीमा बढ़ाती रहीं।
मेयर सुनीता दयाल ने निगम की आय की प्रवाह किये बिना बढ़े हुए टैक्स के प्रस्ताव को रद्द करते हुए वो जनता के साथ खड़ी नजर आयीं। अब हाईकोर्ट का निर्णय आ चुका है और जो भी फैसला होगा वो शासन स्तर पर होगा। आज फिर बोर्ड बैठक में मेयर सुनीता दयाल बढ़े हुए टैक्स को लेकर कोई फैसला ले सकती हैं।
सुनीता दयाल ने बताया कि उनका प्रयास है कि जनता पर बढ़ा हुआ टैक्स लागू ना हो। बहरहाल, यदि हाईकोर्ट मामला नहीं जाता तो निगम बोर्ड जनता के हित में फैसला लेता। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद शासन भी कोई फैसला ले सकता है। मेयर सुनीता दयाल ने बताया कि उनका प्रयास रहेगा कि सभी जनप्रतिनिधियों के सहयोग के साथ शासन स्तर पर जनता के हित में फैसला हो।