गाजियाबाद (युग करवट)। महापौर श्रीमती सुनीता दयाल ने कहा कि उन्हें बोर्ड बैठक बुलाने में कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि वो खुद चाहती है कि बोर्ड बैठक समय पर हो। युग करवट से बातचीत में उन्होंने कहा कि तीन बार बोर्ड बैठक उन पार्षदों की वजह से कैंसिल हुई है जो अफसरों की हां में हां मिलाते हैं।
उन्होंने बोर्ड बैठक के लिए अफसरों से कहा लेकिन जब कुछ पार्षदों से अफसरों ने कहा कि अभी बैठक नहीं बुलाई जाए तो उन पार्षदों ने अफसरों की हां में मिलाते हुए कहा कि ठीक है कोई बात नहीं बाद में बोर्ड बैठक हो जाएगी। सुनीता दयाल ने बताया कि उन्हें बोर्ड बैठक बुलाने में कोई परेशानी नहीं है। वो सदन की मुखिया हैं और उनका प्रयास रहता है कि जो भरोसा जनता ने उन पर किया है उस पर वो खरा उतरें। उन्होंने ये भी बताया कि उनके लिए सभी वार्ड बराबर हैं, सभी पार्षद बराबर हैं, वो दो पार्षदों की मुखिया नहीं है वो सभी पार्षदों की मुखिया है और उनका प्रयास रहता है कि हर वार्ड में जरूरत के हिसाब से काम हो। उन्होंने ये भी बताया कि बहुत से वार्डों में उन्होंने बिना पार्षद से बात किये विकास कार्य किये। क्योंकि जनता ने उन पर भरोसा किया है। सुनीता दयाल ने बताया कि कुछ पार्षद अपने वार्डों में करोड़ों के काम करा लेते हैं जबकि उनके वार्ड पहले से ही पॉश इलाके में आते हैं। कुछ ऐसे भी वार्ड हैं जहां पर काम की बहुत जरूरत है वो उसके हिसाब से काम करती हैं। वहीं उन्होंने कहा कि निगम में केवल एक ही पद हैं वो सवैंधानिक पद केवल मेयर का पद है। इसके अलावा कोई पद भी नहीं है।
ये मालूम करने पर कि उपाध्यक्ष के पद की क्या भूमिका है, उनका कहना था कि कार्यकारिणी की बैठक के दौरान उपाध्यक्ष उसमें मौजूद रहते हैं। उन्होंने ये भी बताया कि ना डिप्टी मेयर का पद है और ना उपाध्यक्ष। कार्यकारिणी का उपसभापति होता है। मेयर सुनीता दयाल ने बताया कि उनका यही प्रयास रहता है कि सभी को साथ लेकर वो शहर के विकास को गति दें और यही उम्मीद वो सभी पार्षदों से करती है कि संयुक्त रूप से कार्य करके लोगों ने जो भरोसा जताया है भाजपा पर उस पर वो खरा उतरें। मेयर सुनीता दयाल ने बताया कि एक हजार करोड़ से अधिक की जमीन से उन्होंने कब्जामुक्त कराया है। उन्होंने बताया कि क्रॉसिंग में एक प्लॉट ही एक हजार करोड़ के आसपास था उसको भूमाफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया गया। सुनीता दयाल ने बताया कि हजारों करोड़ों की निगम की जमीन को मुक्त कराया है जो अपने आप में एक इतिहास है। कहीं भी कोई कब्जे की शिकायत मिलती है तो वो पहले अफसरों से जांच कराती हैं और फिर खुद मौके पर जाकर भूमि को मुक्त कराती हैं।