अमेरिका में हुए चुनाव से दुनिया में संदेश
अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में जिस तरह वहां की जनता ने निर्णय लिया है उससे पूरी दुनिया में एक बहस शुरू हो गई है। अमेरिका की जनता ने ये अहसास करा दिया कि उसकी अदालत सर्वोपरि है और उसके बाद जो वोट की ताकत है उससे बड़ी कोई ताकत और उससे बड़ा कोई हथियार नहीं हो सकता। अमेरिकी चुनाव का परिणम अपने आप में उन लोगों के लिए बड़ा संदेश है जिनको लगता है कि जनता को बेवकूफ बना सकते हैं और जनता बेवकूफ बनती रहेगी। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव का टें्रड इसी वजह से है कि वहां पर राष्टï्रपति कोई तानाशाही दिखाता है तो उसकी ताकत को जनता अपने वोट से कम कर देती है। डोनाल्ड ट्रंप राष्टï्रपति तो बने रहेंगे लेकिन वो कोई भी बड़े फैसले नहीं ले सकते। क्योंकि हाउस और सेनेट में वो अपना बहुमत खो चुके हैं। इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले उन्हें डेमोक्रेट से समझौता करना पड़ेगा जो आसान नहीं है। इतना ही नहीं ट्रंप ने अब्दुल रहमान मोहम्मद सैयद जो पहले मुस्लिम सीनेटर बने है उनके बारे में सार्वजनिक मंचों से कहा था कि वो आतंकवादी हैं, जेहादी हैं और उनके सीनेटर बनने से हाउस में और सीनेट में बकायदा मेटलडिटेक्टर लगाने पड़ेंगे लेकिन ट्रंप की अमेरिकी जनता ने एक नहीं सुनी और प्रचंड बहुमत से अब्दुल को जिता दिया। यानि जेहादी मुद्दा वहां नहीं चला और ट्रंप को करारी शिकस्त का मुंह देखना पड़ा। हैरत की बात तो ये है कि हमारे देश में भी अब्दुल को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है एआईआईएम प्रमुख ओवैसी अब्दुल की जीत पर बड़े खुश हैं। अब अखिलेश यादव को समझना चाहिए कि अब्दुल दरियां नहीं बिछाएगा उसे सत्ता में भागेदारी चाहिए। ओवैसी को समझना चाहिए कि भारत में अब्दुल का मतलब और है और अमेरिका में जीते अब्दुल का नाम ही अब्दुल है। बहरहाल, वोट की ताकत ने ट्रंप को जिस तरह झटका दिया है उसका पूरी दुनिया में संदेश गया है और ये अहसास कराया है कि वोट की ताकत के आगे कुछ नहीं है। बस उसका सही इस्तेमाल होना चाहिए। जय हिंद