ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। विपक्ष उनके खिलाफ एक माह से अधिक आंदोलन चला रहा है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद से लेकर सडक़ तक विपक्ष आंदोलन कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और ऐसे में कोई भी फैसला सडक़ पर नहीं हो सकता। कांगे्रस सहित १९ विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान दिल्ली में बड़ी रैली की। हजारों की संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता उसमें शामिल हुए। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का भाषण काफी प्रभावी रहा। राहुल ने कहा कि वो जो कहते हैं वो होता है। ज्ञानेश कुमार हटेंगे ही नहीं जेल भी जाएंगे। अभी तक ये सब मुंगेरीलाल के सपनों तक ही सीमित है। दरअसल, कोई भी आंदोलन हो जब तक उसमें जनता की भागीदारी नहीें होती वह सफल नहीं होता और कॉकरोच पार्टी ने नीट पेपर लीक को लेकर जो आवाज उठाई उसमें प्रभावित और पीडि़त लोग उस आंदोलन का हिस्सा बने और आंदोलन सफल रहा। १२ साल में पहली बार जेनजी के आगे मोदी सरकार झुकी और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ। किसानों के आंदोलन से भी सरकार नहीं झुकी थी। क्योंकि उसमें आम आदमी नहीं जुड़ा था। अब यही तस्वीर विपक्ष के आंदोलन की है। इसमें आम जनता नहीं जुट पा रही है। विपक्षी नेता बार-बार ये बात कह रहे हैं कि वो लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और आम लड़ाई आदमी की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन एक माह से चल रहे आंदोलन में भीड़ तो आ रही है लेकिन वो कार्यकर्ताओं की है। १३ करोड़ से अधिक लोगों के वोट कटने की बात कही गई है। दिल्ली में ही ४७ लाख लोगों के वोट कटे हैं, लेकिन रामलीला के आंदोलन में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं आया जिसके वोट कटे हों। १३ करोड़ लोग अगर सडक़ों पर आ जाएं या १३ करोड़ से आधे लोग सडक़ों पर आ जाएं। दिल्ली में ४७ लाख नहीं भी आएं अगर दो लाख भी आ जाएं तो आंदोलन का रूप क्या होगा और फिर कोई भी आवाज को नहीं दबा सकता और ना ही कोई ज्ञानेश कुमार को बचा सकता, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है क्योंकि १३ करोड़ में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसका वोट कटा हो और वो सडक़ पर आया होगा। भले ही विपक्ष आम लोगों की लड़ाई का दावा कर रहा है लेकिन आंदोलन केवल और केवल राजनीतिक आंदोलन ही है जन आंदोलन नहीं बन पा रहा है। क्या विपक्ष के दावे में कोई दम नहीं है या फिर लोग बाहर निकलना ही नहीं चाह रहे हैं जब तक लड़ाई जन आंदोलन के रूप में नहीं लड़ी जाएगी कोई भी आंदेलन सफल नहं हो सकता। जय हिन्द