गाजियाबाद विधानसभाओं को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम
गाजियाबाद (युग करवट)। किसी भी कार्यक्रम में चले जाओ बस वहां एक ही चर्चा हो रही है कि विधानसभा चुनाव में किसका टिकट हो रहा है, किसका टिकट कट रहा है।
दावे ऐसे हो रहे हैं मानों जैसे दावा करने वाले ही टिकट देंगे। किसी से भी मालूम करो तो उसका एक ही जवाब है कि मोदीनगर कट रहा है, मुरादनगर कट रहा है, लोनी कट रहा है, साहिबाबाद तो पक्का बदला जा रहा है, शहर सीट पर भी बदलाव है, अब शहर पर वैश्य लड़ेगा, दो ब्राह्मïणों को लड़ा नहीं सके। तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन जमीनी तौर पर किसी के पास कोई भी ठोस जानकारी नहीं है। होर्डिंग्स लगाने से और दीवारों पर लिखने से कोई टिकट नहीं मिलता। भारतीय जनता पार्टी को तो इतिहास ही सबसे अलग है। अंतिम समय तक पता ही नहीं चला कि किसका टिकट होगा या किसका कटेगा। लोकसभा का चुनाव हो तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि मौजूदा सांसद अतुल गर्ग को टिकट मिल जाएगा और जनरल वीके सिंह का टिकट कट जाएगा। वो जनरल वीके सिंह जो देश की आन-बान और शान हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें पूरी तरह से आश्वस्त किया गया था कि जाइये तैयारी कीजिये टिकट आपका ही है। उनका भी टिकट कट गया। शहर सीट पर उपचुनाव हुआ। किसी को उम्मीद नहीं थी कि एक बड़े जनप्रतिनिधि के विरोध के बाद भी संजीव शर्मा को टिकट मिल जाएगा, लेकिन उन्हें टिकट मिला। २०२२ के विधानसभा चुनाव में तमाम टिकट रिपीट कर दिये गये, ऐसी भी उम्मीद नहीं थी और अब फिर यही चर्चा चल रही है कि गाजियाबाद की विधानसभाओं में नये चेहरे दिखाई देंगे।
कोई कहता है कि रातोंरात यूपी भाजपा कमेटी में स्थान पाने वाले गृहमंत्री अमित शाह के खास अंकुर शर्मा और यतेंद्र शर्मा को पार्टी टिकट देगी। कोई कहता है उन्हें साहिबाबाद से मिलेगा, कोई कहता है अनूपशहर से मिलेगा, कोई कहता है कि रामवीर उपाध्याय के विधानसभा क्षेत्र से भी लड़ सकते हैं। जबकि भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा कहते हैं कि इस बार पार्टी उन्हें साहिबाबाद से टिकट देगी।
उनका कहना है कि वो लंबे समय से पार्टी में हैं और मौजूदा विधायक चार बार टिकट ले चुके हैं। हर बार उनको मौका नहीं मिलेगा, इसलिए कार्यकर्ताओं के मन की बात पर फैसला होगा तो वो अजय शर्मा ही कार्यकर्ताओं के मन में हैं। सदर विधायक संजीव शर्मा को लेकर भी चर्चा है लेकिन उन्होंने एक ऐसी लंबी लकीर खींची है, जनता के बीच में रहने की, इसलिए उन्हें आसानी से पार्टी कैसे नजरअंदाज कर सकती है। वैसे भी मौजूदा सांसद अतुल गर्ग का उन्हें पूरा आशीर्वाद प्राप्त है। हालांकि इस सीट पर मजबूत दावेदारों की बात करें तो उनमें विभू बंसल सबसे आगे हैं। हालांकि महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल और जीडीए बोर्ड सदस्य पवन गोयल भी कार्यकर्ताओं की पसंद हैं। बहरहाल, किसको टिकट मिलेगा, किसको नहीं मिलेगा, किसकी मेहनत रंग लाएगी, किसकी परिक्रमा सफल होगी ये तो तभी पता चले जब दिल्ली और लखनऊ से कोई संदेश आएगा। वरना सब एक-दूसरे का टिकट भी कटवा रहे हैं और एक-दूसरे को टिकट भी दिलवा रहे हैं।