मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांगे्रस-सपा सहित १९ विपक्षी दल एक माह से अधिक समय से जो आंदोलन कर रहे हैं १७ नवंबर के बाद फिर राहुल और अखिलेश क्या करेंगे। क्योंकि १७ को सुप्रीम कोर्ट एसआईआर को लेकर फैसला सुनाएगा। कानून के जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही एसआईआर को लेकर बिहार विधानसभा चुनाव में बहुत कुछ स्पष्टï कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग को संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं और वो जो भी फैसला लिया है वो संवैधानिक सम्मत है। इसलिए १७ नवंबर के फैसले के बाद फिर कांगे्रस के नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव क्या करेंगे। कानून के जानकारों का कहना है कि थोड़ी बहुत प्रशासनिक स्तर पर वोटरों को लेकर गड़बडिय़ां हो सकती हैं, लेकिन एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के साथ खड़ा है और वो कह भी चुका है कि किसी भी राजनीतिक दबाव में वो फैसला नहीं करेगा। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ जो मार्च का ऐलान किया था उसी समय सीबीआई ने बहुत कुछ अहसास करा दिया था और अब यही लगता है कि एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट कोई नया फैसला नहीं देगा क्योंकि वो पहले से ही इसे संवैधानिक अधिकार मानता है। वैसे भी १९ विपक्षी संगठनों के आंदोलन में जिस तरह से ३० से ४० हजार लोग ही इकट्ठा हुए उसने भी बहुत कुछ बयां कर दिया है। दिल्ली की आबादी एक करोड़ ४० लाख है और उसमें ४७ लाख वोट कटे पर कोई नहीं आया। एनसीआर की बात करें तो दिल्ली और एनसीआर की आबादी लगाकर ढाई से तीन करोड़ बैठती है। फिर भी आंदोलन जन आंदोलन नहीं बन पाया। इसलिए अब कांगे्रस की परेशानी १७ नवंबर के बाद बढऩे की उम्मीद है। क्योंकि जैसे कानून के जानकार कहते हैं कि एसआईआर को अगर खत्म करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट नहीं दिया, जिसकी ज्यादा उम्मीद है फिर राहुल और अखिलेश क्या करेंगे। केंद्र की मोदी सरकार भी इसलिए शांत है। हालांकि एक चर्चा जरूर चल रही है कि चुनाव आयोग को लेकर जिस तरह आंदोलन चल रहा है कम से कम मुख्य चुनाव आयुक्त अपने चुनाव आयुक्तों के साथ आकर अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। भाजपा ही उनका पक्ष रख रही है। इसका संकेत सही नहीं जा रहा है। बहरहाल, राहुल गांधी का यह दावा कि ज्ञानेश कुमार हटेंगे, जेल जाएंगे लगता है बस यह नारा हवा हवाही में ही रहेगा। क्योंकि जब कुछ संविधान के तौर पर है तब फिर कार्रवाई कैसे होगी। प्रशासनिक स्तर पर जो गड़बडिय़ां सामने आई हैं उन पर कार्रवाई हो रही है। अगर विपक्ष के आंदोलन के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कार्यकर्ताओं में भी जोश कम होगा। क्योंकि जन आंदोलन ही हमेशा कामयाब रहे हैं। जय हिन्द