गाजियाबाद में 5 नवंबर को होने जा रही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पदयात्रा महज एक स्थानीय संगठन कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी का आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा में एक सोचा-समझा रणनीतिक कदम है। भाजपा के लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान के तहत हो रहा यह आयोजन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक केंद्र गाजियाबाद में सियासी तापमान को बढ़ाने के लिए तैयार है। राजनगर एक्सटेंशन में प्रस्तावित इस मेगा इवेंट में 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ जुटने का अनुमान है, जो भाजपा के सांगठनिक कौशल और बूथ स्तर की तैयारियों की पहली बड़ी परीक्षा भी होगा। यह पदयात्रा ऐसे समय में हो रही है जब विपक्ष खासकर ‘इंडिया’ गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित गड़बडिय़ों को लेकर मोर्चा खोल रखा है। विपक्षी दलों की वोट बचाओ, देश बचाओ मुहिम के जवाब में भाजपा ने अपने इस तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान का अंतिम और सबसे बड़ा दांव गाजियाबाद में लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री का स्वयं इस समापन यात्रा का नेतृत्व करना दर्शाता है कि पार्टी आलाकमान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक जमीन को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहता। इस यात्रा के तीन मुख्य आयाम हैं। पहला, हालिया दिनों में विपक्ष द्वारा उठाए गए लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े नैरेटिव की काट तैयार करना और जनता के बीच जाकर सीधे संवाद स्थापित करना। दूसरा, केंद्र और प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को दोबारा लामबंद करना और तीसरा, भाजपा के विशाल कैडर में आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए नए जोश का संचार करना। गाजियाबाद की इस पदयात्रा में प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेता, मंत्री और विधायक भी कदम से कदम मिलाएंगे। मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं को संबोधित भी करेंगे, जहां से एक बार फिर तीसरी बार योगी सरकार के संकल्प को हवा दी जाएगी। यह पदयात्रा भाजपा के लिए कानून-व्यवस्था और सुशासन के अपने प्रमुख एजेंडे को जनता के सामने दोहराने और विपक्ष की कथित अराजकता की राजनीति को बेनकाब करने का एक बड़ा मंच साबित होने जा रही है।