विधान परिषद चुनाव परिणाम
विधानसभा चुनाव २०१७ को लेकर अब कम ही समय बाकी है। सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी विधानसभा के चुनाव से पहले कोई चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है। विधान परिषद के चुनाव परिणाम ने अब पंचायत चुनाव को कुछ माह के लिए टाल दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से तीन माह में पंचायत चुनाव कराने को कहा था लेकिन सरकार नहीं चाहती है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले हो। क्योंकि अगर पंचायत चुनाव में भाजपा को करारी हार मिली तो फिर २०२७ के विधानसभा चुनाव में स्थिति और बिगड़ जाएगी इसलिए राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। विधान परिषद का चुनाव परिणाम इस तरह रहेगा इसका अहसास भाजपा को नहीं था। 11 सीटों में से कई सीटें सपा ने जीती हैं और बड़े मार्जन के साथ जीत दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में कई घंटे की काउंटिंग रोकने के बाद वहां पर २७६ वोटों से भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई है। इतने कम वोटों से जीतने वाले धु्रव त्रिपाठी पहले उम्मीदवार होंगे वो भी मुख्यमंत्री के गृह जनपद में। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में तो सपा के उम्मीदवार ने दर्ज कराकर बड़ा संदेश दिया। लखनऊ और प्रयागराज में भी अधिकतर वोटों से जीत हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ज्यादा मजबूती से अपने आप को नहीं दिखा पायी। मेरठ की दोनों सीटें भाजपा के खाते में गई। हालांकि ये सीटें पहले भी भाजपा के ही पास थी। मुरादाबाद मंडल में सपा कुछ खास नहीं कर पायी और यहां पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया। विधानसभा चुनाव के परिणामों ने इस बात का अहसास करा दिया है कि पूर्वांचल बुंदेलखंड में पीडीए को लेकर जिस तरह से समाजवादी पार्टी लोकसभा में चली थी कहीं ना कहीं इसका असर आज भी है। जब सरकारी कर्मचारियों का रूझान सरकार के खिलाफ होता है तो इसका बड़ा संकेत जाता है। पढ़े-लिखे लोगों का जब मन परिवर्तन की ओर होता है तो उसका भी बड़ा संदेश जाता है। विधान परिषद चुनाव आम चुनाव नहीं थे, ये शिक्षित लोगों के चुनाव थे और शिक्षित लोगों ने जिस तरह से अपने वोट का इस्तेमाल किया ये भी अपने आप में बड़ा संदेश है। समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल पर बेलेट पेपर पर मोहर लगाकर बड़ा संकेत दिया है। अब विधानसभा चुनाव तक ये संदेश और संकेत बरकरार रहेंगे ये देखने वाली बात है। जय हिंद