युवाओं को क्या दे रहे हैं संदेश
राजनीति में जो शब्द इस्तेमाल होते हैं उनका एक अलग प्रभाव होता है। बड़े राजनेता जब पहले बोला करते थे तब उनके भाषण का एक-एक शब्द युवा पीढ़ी को नई दिशा देता था। इतिहास गवाह है कि राजनेताओं के शब्दों से चुनावी माहौल ही नहीं बदलता था बल्कि एक अच्छा संदेश भी जाता था। दो दशकों से जो राजनीति की तस्वीर बदली है उससे केवल एक दूसरे के प्रति नफरत के अलावा कोई संदेश नहीं गया। संवैधानिक पदों पर आासीन राजनेता जिस तरह के शब्दों का प्रयोग सार्वजनिक मंचों से करते है उसका युवा पीढ़ी में सकारात्मक संदेश नहीं जा रहा है। वक्ती तौर पर तो तालियां बज जाती है लेकिन फिर वो एक नई इबारत उनके शब्दों से लिखी जाती है। मौजूदा मुख्यमंत्री हों या पूर्व मुख्यमंत्री हो उनके शब्द अच्छा संदेश नहीं देते। कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे, बंटोगे तो कटोगे, ऐ पुलिस वाले, मोदी तो गया, टाटा बाय-बाय ये क्या शब्द हैं। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मोदी बोलते हैं। मोदी क्या कर रहा है। ये कौन सी भाषा है। मोदी अब जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कहते हैं कि ऐ पुलिस वाले, ऐ पुलिस वाले ये क्या अंदाज है। इस तरह के शब्द अच्छा संदेश नहीं देते। केंद्र के एक मंत्री भी जिस तरह से बोलते हैं जबकि वो एक महत्वपूर्ण मंत्रालय के प्रमुख हैं उनके शब्द भी युवा पीढ़ी को सही संदेश नहीं देते। राजनीति अपनी जगह है लेकिन जब सार्वजनिक मंचों से संबोधन होता है तो कम से कम इस बात ख्याल रखना चाहिए कि उनके भाषण से, उनके शब्दों से समाज में क्या संदेश जाएगा। बात विकास की होना चाहिए, बात मुद्दों पर होना चाहिए, जब मंच पर कोई भी चाहे वो मौजूदा संवैधानिक पद पर हो या रह चुका हो उसे इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि जो कह रहा है उसका संदेश समाज में क्या जाएगा। क्योंकि कार्यक्रम में आने वाले या जनसभा में आने वाले लोग वहां एक अच्छा संदेश लेकर जाएं ताकि समाज में एक नया माहौल बने। राजनीति के चक्कर में युवाओं को ऐसा संदेश ना दें जो उनका अभी से ही दिमाग बदल जाए। भारत युवाओं का देश है और उनको हम जो परोसेंगे वही उनके लिए एक संदेश होगा। राजनीति के चक्कर में हम अपनी भाषा और शब्दों पर जरूर ध्यान दें। अतीत को याद रखें कि बड़े-बड़े महापुरुषों ने अपने भाषणों से देश में क्रांति लाये थे। कम से कम उन जैसी क्रांति नहीं भी लायें तब भी युवाओं को एक ऐसा संदेश दें जो उनके मन में घर कर जाए। सत्ता तो आती-जाती रहती है, समाज यहीं रहेगा, देश यहीं रहेगा और हमारी जिम्मेदारी है कि हम जो आज माहौल देंगे वही माहौल एक नया सवेरा लाएगा। इस शेर के साथ अपनी बात खत्म करता हूं-
अमल से काम चलेगा नजीर से थोड़ी
निशाना आंख से लगता है तीर से थोड़ी।।
ऐ साहिबे आलम आवाम आपकी है,
सवाल आपसे से होंगे वजीर से थोड़ी। जय हिंद