नारी शक्ति वंदन अधिनियम
लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास नहीं हुआ और सत्तारूढ़ दल के पास वोट नहीं थे इसलिए विपक्ष की जीत हो गई। विपक्ष भी अपनी पीठ खुद थपथपा रहा है कि हमने बिल पास नहीं होने दिया। लेकिन पूरे घटनाक्रम पर अगर नजर डाली जाए तो विपक्ष का ये तीर उल्टा उसी को लग रहा है। भाजपा जो चाहती थी वही हुआ। 17 अप्रैल के बाद से लेकर लगातार भाजपा आधी आबादी के साथ धोखेबाजी के आरोप विपक्ष पर लगा रही है। बकायदा सम्मेलन हो रहे हैं, विधानसभाओं में निंदा प्रस्ताव पास हो रहे हैं, नगर निगमों में निंदा प्रस्ताव पास हो रहे हैं और ऐसा लग रहा है मानो जैसे आधी आबादी के दुश्मन जैसे विपक्ष के लोग हैं। विपक्ष जीतने के बाद भी अपने आप को अभी तक ये साबित नहीं कर पाया कि आखिरकार उसने क्यों विरोध किया। अंजुम रहबर का एक शेर मुझे याद आ रहा है जो विपक्ष के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है-
‘अंजुम मैं ये जीतकर भी सोचती रही जो हारकर गया वो बड़ा खुशनसीब था।’
जाहिर बात है सत्तारूढ़ दल भले ही सदन में हार गया हो, विपक्ष जीत गया हो लेकिन ये हार विपक्ष के लिए सही संकेत नहीं है। तीसरी आंख ने देखा कि विपक्ष ने जिस मुद्दे को लेकर आरक्षण का विरोध किया था वो बात बताने में बिल्कुल सफल नहीं हो रहा है। विपक्ष पहले दिन कहा था कि वो महिला आरक्षण बिल के खिलाफ नहीं है वो चाहते हैं कि 2011 की जनगणना के बदले 2026 की जनगणना के हिसाब से महिलाओं को आरक्षण मिले। लेकिन आज अगर सबसे बड़ा कोई महिलाओं का विरोधी है तो वो विपक्ष है, कांगे्रस है, समाजवादी पार्टी, टीएमसी है और ये बताने में भाजपा पूरी तरह से सफल हो रही है। 2027 का यूपी का विधानसभा चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा जाएगा इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि यूपी के विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष की महिलाओं ने जो अपने बयान दिये वो भी वास्तव में बहुत ही सकारात्मक रहे। फिलहाल तो महिलाओं को लेकर विपक्ष जीतने के बाद भी जीरो है और सदन में हार के बाद भी भाजपा हीरो है। जय हिंद