राज्यसभा चुनाव
राज्यसभा सदस्यों के चुनाव की तिथि का ऐलान हो गया है। सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा को आठ और सपा को दो सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है। जबकि बसपा को अगर भाजपा ने समर्थन नहीं दिया तो बसपा लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पूरी तरह से शून्य हो जाएगी। अगर भाजपा बसपा को समर्थन देगी भी तो उसको २०२७ के विधानसभा चुनाव में नुकसान होगा और जो लोग चर्चा करते हैं कि बसपा भाजपा की बी पार्टी उस पर मुहर लग जाएगी। हालांकि पहले भी रामजीलाल गौतम जो बसपा से राज्यसभा गये थे तब भी वो भाजपा के सहयोग से ही गये थे। लेकिन अब तो बसपा के पास कोई भी विधायक नहीं है इसलिए अगर भाजपा उनको सहयोग नहीं करेगी तो बसपा शून्य हो जाएगी। वैसे भाजपा अगर बसपा को सहयोग करेगी तो वो सात सीटें ही जीत पाएगी। वहीं अखिलेश यादव को इस बार दो के बदले तीन सीटें जीतने की उम्मीद है। उनके पास ऐसे विधायकों की संख्या जो भाजपा में हैं लेकिन उनको लगता है कि भाजपा उन्हें टिकट नहीं देगी और वो सपा का दामन थाम सकते हैं इसलिये वो क्रॉस वोटिंग करके सपा का तीसरा उम्मीदवार जिता सकते हैं। वर्तमान में भाजपा से ब्रजलाल पूर्व डीजीपी जिनकी उम्र ८० के आसपास है उनको पार्टी रिपीट नहीं करेगी और किसी अन्य दलित चेहरे को लायेगी। शाक्य समाज से जो महिला है उन्हें पार्टी फिर भेज सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर का फैसला भी अब पीएमओ करेगा। संजीव बालियान को भेजने की चर्चा है। इसके अलावा दलित समाज से पूर्वांचल से प्रियंका रावत की चर्चा है। वहीं समाजवादी पार्टी से राष्टï्रीय महामंत्री रामगोपाल यादव एक बार फिर राज्यसभा भेजे जा सकते हैं। वहीं पूर्व आईएएस आलोक रंजन समाजवादी पार्टी से इस बार राज्यसभा जा सकते हैं। सपा तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी अपनी तैयारी कर रही है और हो सकता है कि वो पीडीए से किसी को राज्यसभा भेजे। ये तभी संभव है जब क्रॉस वोटिंग होगी। वैसे भी अखिलेश यादव ने भाजपा से आने वालों से कहा कि वो राज्यसभा में वोटिंग के दौरान वफादारी का सबूत दें तब पार्टी भी उन्हें वफादारी से जवाब देगी। बहरहाल, कई बार मुख्यमंत्री बनने वाली और बसपा प्रमुख मायावती और उनकी पार्टी की ये स्थिति होगी कि ना लोकसभा में ना राज्यसभा में ना विधानसभा परिषद ना विधानसभा में एक भी सदस्य नहीं है। ऐसी तस्वीर होगी किसी ने ऐसा सोचा भी नहीं होगा। जय हिंद