राज्यसभा उम्मीदवार घोषित
आखिरकार राज्यसभा के आठ उम्मीदवारों की घोषणा भाजपा हाईकमान ने कर दी है। उत्तर प्रदेश से आठ सदस्य राज्यसभा जाएंगे। इस बार जिन लोगों के नाम की चर्चा चल रही थी थी उसमें से दो ही नाम इसमें आये हैं। बाकी हरदीप सिंह सूरी, ब्रजलाल और बीएल वर्मा को इस बार पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर चर्चा चल रही थी कि संजीव बालियान, सतपाल सिंह को भाजपा राज्यसभा भेजेेगी लेकिन ऐसा हो ना सका। इतना ही नहीं बीच में खबर आयी कि जयंत चौधरी को भी भाजपा राज्यसभा भेज सकती है पर ऐसा हो ना सका। जयंत चौधरी वर्तमान में समाजवादी पार्टी के बल पर राज्यसभा सदस्य हैं। राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भाजपा ने कोई भाव नहीं दिया जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश अहम भूमिका निभाता है। गुर्जर समाज और जाट समाज भाजपा से अंदरखाने नाराज चल रहा है। हालांकि गुर्जर समाज को लेकर क्षेत्रीय अध्यक्ष की तैनाती की गई है। सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन किया गया है लेकिन जाट समाज को उम्मीद थी कि भाजपा हाईकमान जरूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट समाज के मजबूत नेता संजीव बालियान को राज्यसभा भेज सकती है। लेकिन पूर्व विधायक संगीत सोम से उनका छत्तीस का आंकड़ा और कॉस्ट्टियूशन क्लब के चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह के उम्मीदवार के खिलाफ उनका चुनाव लडना उनकी राह में रूकावट बन गया। दरअसल दिल्ली वाले किसी बात को आसानी से नहीं भूलते और वे वक्त आने पर जोर का झटका धीरे से दे देते हैं। क्योंकि अब पुराने वाली भाजपा नहीं है जिसको इस बात की चिंता होती थी कि हमारा कार्यकर्ता नाराज ना हो जाए। आज तो नई भाजपा है और उनके पास मजबूत नेतृत्व है और उनके पास मोदी जी हैं तो सबकुछ मुमकिन है इसलिए वो कोई भी आगे-पीछे के नुकसान की परवाह नहीं करती। उम्मीदवारों में बहुत ही सोच समझकर जातीय संतुलन का ख्याल रखा गया है। ओबीसी और दलित पर पूरा फोकस रहा। उम्मीदवारों में पीडीए की झलक देखी गई है। ऐसी जातियों का संतुलन रखा गया है जो पर्दे के पीछे चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं और वो किसी और के साथ ना चले जाए इसलिए ऐसे जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार घोषित किय है। बहरहाल, भाजपा अब इस बात की परवाह नहीं करती है कि किस समाज के नेता को ना लेने से वोट बैंक नाराज होगा। उसको जो फैसला लेना होता है वो ले लेती है क्योंकि आज उसका समय चल रहा है। आज भाजपा की मजबूरी नहीं है बल्कि उनके साथ रहने के लिए लोग खुद तैयार हैं। एक नहीं कई प्रमाण इसके सामने आ चुके हैं और कोई भी ठोस कदम लेने से पीछे नहीं हटती है। उम्मीदवारों की तस्वीर से यही लगता है कि वो ऐसे समाज को साथ लाने का प्रयास कर रही है जो कमिटेड है और इसी कारण ऐसे समाज के लोगों को ही टिकट दिये गये हैं। जय हिंद