बढऩे लगी सियासी सरगर्मियां
राज्यसभा चुनाव २०२७ के विधानसभा चुनाव की काफी तस्वीर साफ करेगा। सपा के पास जितने विधायक है उनसे केवल वो दो ही सीटें राज्यसभा की जीत सकते हैं लेकिन तीसरे उम्मीदवार की चर्चा ने भाजपा हाईकमान की चिंता बढ़ा दी। ये भी हो सकता है कि ये राज्यसभा चुनाव भाजपा के लिए एक आईना हो। दरअसल, विधानसभा चुनाव अगले साल होना है पांच महीने का समय बाकी है और राज्यसभा चुनाव इसी माह होना है जाहिर है कि कौन किसके प्रति कितना वफादार है ये सारी तस्वीर इसी महीने साफ हो जाएगी। कल जिस तरह भाजपा सरकार में वरिष्ठ मंत्री राकेश सचान सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने के लिए लाइन में खड़े थे ये अपने आप में एक बड़ी तस्वीर थी। राकेश सचान जिस क्षेत्र से आते हैं उस क्षेत्र में उनका बहुत अच्छा प्रभाव है। वरिष्ठ राजनेता हैं। जाहिर है राज्यसभा चुनाव से पहले अखिलेश से उनकी मुलाकात सामान्य घटना नहीं हो सकती। हालांकि अखिलेश यादव ने कहा है कि ये शिष्टïाचार भेंट थी। लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और ही चल रहा है। इस कॉलम में कई ये लिखा जा चुका है कि भाजपा के कई विधायक सपा के सम्पर्क में हैं। हालांकि ये सम्पर्क एक साल से चल रहा है लेकिन अखिलेश यादव में राज्यसभा चुनाव तक सभी को वेट करने के लिए कहा था। उनका मानना था कि भाजपा का विधायक उनकी पार्टी के प्रति कितना वफादार है इसका पता राज्यसभा चुनाव में ही चलेगा। यही कारण है कि सपा प्रमुख तीसरा उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं। हालांकि तीसरी सीट के लिए भी उनके पास नौ विधायकों की कमी है। लेकिन ये कमी भी आने वाले समय में दूर हो सकती है। क्योंकि जैसे चर्चाएं चल रही हैं 50 से 60 भाजपा विधायक सपा के सम्पर्क में हैं। वैसे भी भाजपा हाईकमान इस बात का संकेत दे चुकी है कि मौजूदा विधायकों के बड़ी संख्या में टिकट कटेंगे। अब जिनको उम्मीद है कि उनके टिकट कटने वाले हैं तो वो अभी से ही अपने नये आशियाने की तलाश में लग गये हैं और सपा से ज्यादा मजबूत राजनीतिक जमीन उनके पास नहीं है। इसलिए आने वाले समय में कौन-कौन सपा प्रमुख से मुलाकात करेगा इस पर सभी की नजर है। हालांकि अब राजनीति में समर्पण, समन्वय, अपनापन, वफादारी ये सब गुजरे जमाने की बात हो गई। अब तो जहां फायदा दिखाई दिया वहीं पर जय-जयकार शुरू कर दी। जय हिंद