राज्यसभा चुनाव
समाजवादी पार्टी राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारने का जोखिम इसलिए ले रही है कि उसे उम्मीद है कि भाजपा जिन विधायकों का टिकट काट रही है वो सपा के लिए क्रॉस वोटिंग करेंगे और इस बात की चर्चा राजनीतिक गलियारों में खूब चल रही है। भाजपा के मौजूदा विधायकों को ये लगता है कि उनका टिकट कटेगा इसलिए वो भी वफादारी के तौर पर सपा का साथ दे सकते हैं ताकि फिर उन्हें २०२७ के विधानसभा चुनाव में सपा का टिकट मिल जाए। सपा भी राज्यसभा चुनाव के सहारे भाजपा को मजबूत माहौल दिखाने का प्रयास कर रही है। तीसरे उम्मीदवार की घोषणा पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव करेंगे। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीसरे उम्मीदवार के रूप में पूर्वांचल के एक ऐसे व्यक्ति का नाम चल रहा था कि जो अगर समाजवादी के टिकट पर राज्यसभा चले जाते तो फिर पूर्वांचल में सपा एक मजबूत स्थिति में खड़ी हो जाती। जिन राजनेता को सपा राज्यसभा भेजना चाहती थी उनकी पूर्वाचंल में बहुत जबरदस्त पकड़ है और वो एक दो नहीं 15 से 20 सीटों पर अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं लेकिन यहां भी रातोंरात कुछ ऐसा हुआ उनका नाम पीछे चला गया। हालांकि वो काफी दिनों से सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का गुनगान कर रहे थे और अखिलेश को भी अच्छा राजनेता बता रहे थे इसके अलावा उनकी तारीफ कांगे्रस को भी अच्छी नहीं लग रही थी लेकिन जिस तरह से अब माहौल बन रहा है उनकी भी वाणी बदल रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आज पूर्वांचल के मजबूत नेता के बारे में कहा कि हमारे उनसे बहुत अच्छे संबंध हैं। चर्चा है कि सपा उन्हें राज्यसभा भेज दें। दरअसल, समाजवादी पार्टी में ऐन वक्त पर जो फैसले बदले जाते हैं उसके पीछे दिल्ली का हाथ होता है। क्योंकि परिवार के एक मजबूत स्तम्भ के ऊपर एक ऐसी तलवार लटक रही है जिसके कारण सपा को अपने फैसले बदलना पड़ते हैं। यही कारण है कि समाजवादी पार्टी खुलकर नहीं खेल पा रही है। पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की बेदाग छवि और उनका जनता में लोकप्रिय होना भी कहीं ना कहीं मोर की स्थिति में लाकर खड़ा कर देता है। क्योंकि यदि पूर्वांचल के मजबूत नेता अगर सपा में आ जाते और राज्यसभा चले जाते तो चुनावी मौसम में बहुत बड़ा संदेश जाता और एक हवा बन जाती। चुनावी मौसम में हवा का रूख अहम भूमिका निभाता है। जय हिंद