यूपी विधानसभा चुनाव अभी दूर सही मगर राजनीति घटनाक्रम अपने चरम पर है। सबसे बड़ा घटनाक्रम बहुजन समाज पार्टी में हुआ जहां पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को निष्कासित कर दिया। उन्होंने पहले कहा था कि अगर आकाश के ससुर इस्तीफा दे दें तो उन्हें वापस लिया जा सकता है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ससुर सिद्घार्थ के इस्तीफा देने के बाद भी आकाश को पार्टी से निकाल दिया गया। अब राजनीति में बड़ा सवाल यह है कि आकाश आनंद करेंगे क्या? क्या वह किसी दूसरे दल में शामिल हो जाएंगे? बहरहाल यह भविष्य के गर्त में है और जल्दी ही इसका जवाब सामने आ ही जाएगा। दूसरी घटना गाजियाबाद से भाजपा की अंदरूनी राजनीति की है। सभी जानते हैं कि नगर निगम में भाजपा के पार्षद और महापौर के बीच कुछ खटास है। नगर निगम के कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी समेत कई पार्षद समय से कार्यकारिणी व बोर्ड की बैठक बुलाने की मांग करते रहते हैं। पार्षदों का यह आरोप काफी पुराने समय से है कि नगर निगम की बैठकें समय से नहीं कराई जातीं, जो नियम विरूद्घ भी है। अब वार्ड 75 के पार्षद हिमांशु शर्मा ने आपरेशन शराफत समाप्त, आपरेशन बगावत शुरू जन अभियान शुरू कर दिया है। जिसमें कहा गया है कि सवाल नगर निगम से नहीं बल्कि सिस्टम से है। इस अभियान में आगे क्या होगा इसका इंतजार रहेगा। गाजियाबाद में कई रामलीला समितियां किसी ना किसी तरह के विवाद में हैं। इस विवाद में नया अध्याय लीला बनाम मेला का जुड़ गया है। हाल ही महापौर ने रामलीला कमेटी से वसूले जाने शुल्क में अस्सी प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की थी। सभी ने इस घोषणा की सराहना की थी। अब लोग रामलीला के दौरान लगाए जाने वाले पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि लीला के मंचन के लिए मैदान के किराए में नगर निगम ने छूट दी है। ऐसे में मेले में लगने वाले झूलों और अन्य दुकानों से जो धन की वसूली होती है, उस पर रामलीला कमेटी का क्या कहना है। क्योंकि जब मैदान कम किराए पर चाहिए तो उसका लाभ दुकानों और झूलों को भी मिलना चाहिए, इससे दर्शकों को भी कम पैसे खर्चने होंगे।