गाजियाबाद में कांग्रेस एक बहुत लंबे समय से वनवास झेल रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हिस्से तकरीबन पांच लाख वोट आए थे, मगर इस ऊर्जा को कांग्रेस का संगठन और इसके नेता बनाकर नहीं रख पाए। इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। गाजियाबाद में भारतीय जनता पार्टी चुनाव की तैयारी में सबसे आगे है, तो समाजवादी पार्टी भी कुछ पीछे नहीं है। घटनाओं को लेकर भी समाजवादी पार्टी काफी सक्रिय रहती है। चिराग हत्याकांड पर सपा नेता अमरपाल शर्मा काफी सक्रिय रहे थे तो कल सपा का एक प्रतिनिधिमंडल हापुड़ में हुए गौरव हत्याकांड के पीडि़तों से मिले थे। जनसमस्याओं को लेकर भी सपा नेता काफी मुखर रहते हैं। सपा के प्रदेश सचिव अभिषेक गर्ग तो कई सम्मेलन भी कर चुके हैं। वह लगातार क्षेत्र के लोगों से संपर्क भी कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों से सभी वाकिफ हैं। वर्तमान में भी बूथ स्तर पर कई कार्यक्रम भाजपा ने चला रखे हैं। मगर कांग्रेस में ना सम्मेलन हो रहे हैं, ना बूथ पर ही कोई काम हो रहा है। बस गाहे बगाहे जिला कार्यालय पर बैठकों की ही जानकारी सामने आ जाती है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। अगर विधानसभा चुनाव मई में भी हुआ तो भी मात्र आठ महीने का ही समय बचा है। संभावना यह भी है कि चुनाव समय से पहले भी किए जा सकते हैं। उस स्थिति में कांग्रेस के सामने कई संकट आ सकते हैं। क्योंकि सपा अपने प्रत्याशी चुनने की प्रक्रिया शुरू भी कर चुकी है। बसपा में भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है। भाजपा के पास समर्पित कार्यकर्ताओं की लंबी फौज है। ऐसे में कांग्रेस का नींद में पड़े रहना समझ में नहीं आ रहा है। भाजपा तो शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव की तैयारी में भी जोरशोर से जुटी हुई है। इस चुनाव में भी कांग्रेस में अभी कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही है। एक बात जरूर है कि किसी कांग्रेस नेता से चुनाव की तैयारी के विषय में बात करके देखिए, आपको हैरान कर देने वाला जवाब मिलेगा। जमीन पर कुछ हो या ना हो परंतु उनके आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं है। पैर किसी के जमीन पर नहीं हैं, मगर सपने सबसे आसमान में हैं।