राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक
कल राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जो फैसले हुए उससे सब हैरान हैं। बहुत ही चौंकाने वाले निर्णय कल हुए हैं। अब चंपत राय का युग पूरी तरह से समाप्त हो गया। हालांकि अभी तक चंपत राय ने अयोध्या नहीं छोड़ी है लेकिन अब उनका और अनिल मिश्रा का युग समाप्त हो गया है। चंपत राय ने भी शायद सोचा नहीं होगा कि इस तरह के भी फैसले होंगे। ऐसा व्यक्ति जो नाम का कोषाध्यक्ष था, जिसके पास चैकबुक भी नहीं थी, बैंक में हस्ताक्षर भी नहीं थे और वो पूरी तरह से चंपत राय पर निर्भर थे वो ट्रस्ट के सबसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन होंगे। इतना ही नहीं छह साल के कोषाध्यक्ष के कार्यकाल में जिस तरह आठ सौ करोड़ की लागत से बनने वाला राम मंदिर कई सौ करोड़ की लागत में बना। वो अब सर्वेसर्वा होंगे। दरअसल कल किसी को उम्मीद नहीं थी कि जिनके कोषाध्यक्ष के कार्यकाल में गोविंद देव गिरि को ट्रस्ट का महासचिव बना दिया जाएगा। वो पूणे में रहते हैं और फ्लाइट से अयोध्या आते हैं, होटल में ठहरते हैं और फिर चले जाते हैं। ऐसे व्यक्ति को महासचिव बनाना लोगों को हजम नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं जो कल कोषाध्यक्ष बनाये गये हैं वो बहुत बड़े उद्योगपति हैं। राम मंदिर का आंदोलन चलाने वाले अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं और गोविंद देव गिरि जी के बहुत ही निकट हैं। उन्हीं के कहने पर उन्हें अयोध्या में मुख्य यजमान बनाया गया है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने गोविंद देव गिरि जिन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए था अब उन्हें महासचिव बना दिया गया है। पूरी तरह से अब उनका ही होल्ड हो गया है। जो दो ट्रस्टी बनाये गये हैं उनमें एक महिला को भी पहली बार बनाया गया है और यादवों की बेल्ट जो इटावा, मैनपुरी, शिकोहाबाद में पूरी तरह से शिकोहाबाद से निर्मला यादव को ट्रस्टी बनाया गया है। यहां आधी आबादी को भी एडजस्ट किया गया है और ओबीसी समाज को मैसेज दिया गया है। पहली बार कोई महिला ट्रस्टी बनीं हैं। कल के फैसले कई तरह के बड़े संकेत दे रहे हैं। चंपत राय जी को उम्मीद थी कि उनके अच्छे दिन आ सकते हैं इसलिए उन्होंने अयोध्या नहीं छोड़ी लेकिन अब अयोध्या से उनका हमेशा के लिए वनवास तय है। राम मंदिर के लेखाकार रहे महिपाल सिंह ने बहुत खुलासे किये हैं उनका कहना है कि एसआईटी की रिपोर्ट पहले ही आउट कर दी गई। पुलिस से पहले वो ट्रस्ट के पास पहुंच गई और फिर ट्रस्ट की ओर से चंपत को क्लीनचिट दिये जाने की खबरें मीडिया में आ गई लेकिन चढ़ावा चोरी की जांच आज भी वहीं की वहीं है। केवल खानापूर्ति ही की गई है और जिनके कोषाध्यक्ष रहते हुए चढ़ावा चोरी हुई उन्हें अब ट्रस्ट का सर्वेसर्वा बना दिया गया है। सीईओ की तैनाती हो गई है और वो भी सीधी रिपोर्ट महासचिव को ही करेंगे। कई नाम चल रहे थे वो सब हवा में रह गये। अब क्या जांच होगी क्या रिपोर्ट आयेगी बस इंतजार करते रहिए। जय हिंद