सोशल मीडिया कैंपेन के सहारे ही सही कॉकरोच जनता पार्टी ने जनता का ध्यान तो आकृषित किया ही है। खासकर जेन जी उनके साथ है। यह अलग बात है कि मृतक छात्रों के परिजनों को कोई सरकारी सहायता मिलने से पहले ही सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा होटल में पार्टी करना भी देश को अखर रहा है। उसकी प्रवक्ता इस संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब तक नहीं दे पाईं। प्रधानमंत्री को लेकर की गई बदतमीजी, अश्लील टिप्पणी आदि पर भी दीपके, सौरभ या किसी और ने ना माफी मांगी, ना शर्म महसूस की। जबकि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बारे में ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए थीं जो जंतर मंतर पर लड़कियों द्वारा कही गईं। दीपके को इन बातों के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए थी। अब कॉकरोच जनता पार्टी का नेता कह रहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की बातों को लेकर छात्रों के मुकदमे वापस नहीं ले रही है इसलिए वह दोबारा सडक़ों पर उतरेंगे। उधर सवाल यह भी उठा कि पेपर लीक मामले में भाजपा सरकार पर तो कॉकरोच हमलावर रहे, मगर पंजाब के लिए वह एक भी शब्द नहीं बोल रहे हैं, जबकि पेपर लीक तो वहां भी हुआ है। लेकिन पंजाब में सरकार भाजपा की नहीं है। वहां शासन आम आदमी पार्टी कर रही है। कॉकरोच ना आम आदमी पार्टी से सवाल कर रहे हैं और ना पंजाब सरकार से। इसी बात से उनकी नियत और मानसिकता सवालों के घेरे में है। सवाल यह है कि कॉकरोच की लड़ाई पेपर लीक मामले की है या केवल भाजपा से है। क्या कोई भी बात करके उन्हें केवल भाजपा का ही विरोध करना है? क्या इसीलिए प्रधानमंत्री को लेकर अभद्र टिप्पणी आंदोलन के दौरान की गईं? देश की जनता इन सवालों का जवाब मांगेगी। कॉकरोच जनता पार्टी भी बहुत दिन तक इन सवालों से भाग नहीं पाएगी। उसको जनता के सवालों का जवाब देना भी होगा। उन्हें यह भी बताना होगा कि पेपर लीक एक समस्या है तो आम आदमी पार्टी और भाजपा सरकार को अलग-अलग चश्मे से क्यों देखा जा रहा है? क्या स्वाति मालीवाल के आरोप सही हैं? इन सवालों को यह लोग बहुत दिन तक दबाकर नहीं रख सकते।