गाजियाबाद के चौधरी मोड़ पर फूल मालाओं का कारोबार दशकों से होता आ रहा है। कार्यक्रम धार्मिक हो या सामाजिक, सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का, संस्था को हो या प्रतिष्ठान का, कोई समारोह हो या शोक, फूल मालाएं आती चौधरी मोड़ से ही हैं। मगर इन फूल वालों की समस्या सुनने को काई तैयार नहीं रहा। कभी यातायात में बाधा उत्पन्न होने और कभी धोबी घाट फ्लाईओवर बनाने के नाम पर इन्हें यहां से उजाडऩे के प्रयास भी कई बार हुए। मगर कोई यह बताने को तैयार नहीं था कि अगर चौधरी मोड़ से फूल वालों को हटा दिया जाएगा तो पहली बात तो यही है कि गाजियाबाद वालों को फूल कहां से मिलेंगे। मतलब गाजियाबाद के लोगों की फूल मालाओं की जरूरत पूरी करने के लिए फूल मार्केट आवश्यक है। नगर निगम या प्रशासन ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। मगर तत्कालीन मेयर आशा शर्मा ने इस बात को समझा था। उनके कार्यकाल में फूल वालों को थोड़ा व्यवस्थित किया गया। मगर सुधार की गुंजाइश अभी भी है।
सुनने में आया है इस पर भी काम शुरू होने की उम्मीद जगी है। अभी खुलकर तो कुछ सामने नहीं आया है, मगर अंदरखाने से खबर है कि नगर निगम की निगाहें चौधरी मोड़ स्थित फूल मार्केट पर पडऩे वाली हैं। सुनने में आया है इसके लिए एक अंदरूनी सर्वे कराया जाएगा। जो लोग फिलहाल किराए पर दुकान लेकर काम कर रहे हैं, उनको अलग किया जाएगा। जो खुद कारोबार कर रहे हैं उनको व्यवस्थित करने की योजना है। मतलब अगर नगर निगम कोई योजना लाता है तो उसका लाभ उसी को मिलेगा जो वहां का स्थाई दुकानदार होगा। किराएदार को कोई लाभ नहीं दिया जाएगा। हालांकि अभी सब कुछ सामने नहीं आया है। मगर इतना जरूर कहा जा सकता है कि इसमें अब बहुत अधिक समय नहीं लगेगा। नगर निगम फूल मार्केट वालों से किराया वसूलेगा तो उसकी आय भी बढ़ेगी, इसके साथ ही सफाई का शुल्क भी लिया जा सकता है। वैसे भी अगर यह दुकानें सही से व्यवस्थित कर दी गईं तो यातायात के साथ सडक़ सफाई भी सुधर जाएगी। आज चौधरी मोड़ पर तीस से अधिक दुकानें हैं, इन पर सैंकड़ों को रोजगार मिला हुआ है। नगर निगम इनको व्यवस्थित कर देगा तो सभी का भला होगा।