कवि गोपालदास नीरज की स्मृति में सजी काव्य संध्या
गाजियाबाद (युग करवट)। मान्यता प्राप्त पत्रकार कल्याण समिति दिल्ली व महाकवि गोपालदास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट आगरा के संयुक्त तत्वाधान में हिन्दी भवन में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जहां कवियों ने ओज, वीर, हास्य, श्रृंगार रस की कविता पाठ से देर रात तक समां बांधे रखा। कार्यक्रम का शुभारंभ दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर के महंत नारायण गिरी महाराज, डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरी महाराज, पदमश्री राष्टï्रीय कवि सुरेन्द्र शर्मा, कवि सर्वेश अस्थाना, भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल, डासना नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी महेश श्रीवास्तव, समिति अध्यक्ष रविन्द्र गुप्ता, कोषाध्यक्ष अशोक कौशिक, दैनिक अथाह के संपादक अशोक ओझा व गौरव शर्मा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएचएआई के चेयरमैन वरिष्ठ आईएएस संतोष यादव ने की। इस अवसर पर युग करवट के एडिटर इन चीफ सलामत मियां एवं जीडीए सचिव विवेक मिश्र को सम्मानित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएचएआई के चेयरमैन वरिष्ठ आईएएस संतोष यादव ने की। मंच पर एनएचएआई चेयरमैन संतोष यादव ने कवियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में बोलते हुए पदमश्री कवि सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि इस देश में मंदिर बनाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इस देश को मंदिर बनाने की आवश्यकता है। कवि सम्मेलन का शुभारंभ डॉ.सीता सागर ने सरस्वती वंदना के साथ किया। पदमश्री गोपालदास नीरज के सुपुत्र शशांक नीरज ने अपनी गजल सुनाई, ‘सयाने फूल हैं खुश्बू की जान हो गए हैं, बहराइच से आए कवि कर्नल संजय चतुर्वेदी ने राष्टï्र भाव से ओतप्रोत कविता ‘बड़े मुल्क को जब अपने हथियार पुराने लगते हैं, छोटे मुल्कों पर क्यों जंग के बादल छाने लगते हैं’। सुनाई। कवि डॉ.श्लेष गौतम ने सुनाया कि ‘पुरुखों ने जो निभाई, हमें चाहिए, त्याग की वो कमाई, हमें चाहिए। डॉ.कविता किरण ने सुनाया कि ‘गीत दिवाकर ढला नहीं,कभी हिमालय गला नहीं। देह मिली केवल रज में, ‘नीरज’ रज में मिला नहीं।’ आईएएस पवन कुमार ने सुनाया कि ‘किसी ने रखा है बाज़ार में सजा के मुझे, कोई खरीद ले कीमत मेरी चुका के मुझे।’ डॉ.सीता सागर ने भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की, ‘घर में मेरे वो दीप जलाकर चला गया, मुझमें वो एक लौ सी जगाकर चला गया। सर्वेश अस्थाना ने राजनीतिक व्यंग्य करते हुए सुनाया कि ‘किसी गिरगिट की नेता से तुलना करना महापाप है, क्योंकि रंग बदलने के मामले में नेता गिरगिट का बाप है।’ अधिशासी अधिकारी महेश श्रीवास्तव ने प्रेम का संदेश देते हुए कहा कि ‘दिल धक-धक करता है तुझको करके याद, तेरे होने से ही तो हम हैं आबाद।’ राष्ट्रीय कवि डॉ. विष्णु सक्सैना ने सुनाया ‘जो हाथ थाम लो वो फिर न छूटने पाये, प्यार की दौलतें कोई न लूटने पाये, जब भी छूलो बुलंिदयां तो ध्यान ये रखना, ज़मीं से पाँव का रिश्ता न टूटने पाये।’ इस अवसर पर जीडीए सचिव विवेक मिश्र, युग करवट के प्रधान संपादक सलामत मियां, शिक्षक नरेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार सुनील यादव, सोनू अरोड़ा, तेजेश चौहान, अजय शर्मा, अमरदीप शास्त्री, विपिन सिंघल, वरिष्ठ भाजपा नेता पवन गोयल, बीके शर्मा हनुमान, वीके अग्रवाल, अमित यादव, प्रमोद यादव, कमल चौधरी, विनय चौधरी, साहिब डबास, शशिकांत भारद्वाज, जमील अहमद आदि मौजूद रहे।