पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर के आरोप पाए गए सही
वर्तमान समिति को कालातीत घोषित करते हुए उसके सभी वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दी गई
नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर के कविनगर रामलीला समिति पर लगाए गए आरोपों को सही मानते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा वर्तमान समिति को कालातीत घोषित करते हुए उसके सभी वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं डिप्टी रजिस्ट्रार ने समिति की जांच प्रकरण निस्तारण होने तक संचालन के लिए पूर्व अध्यक्ष कविनगर निवासी रामकुमार को अध्यक्ष बनाते हुए कार्य करने की अनुमति दी है।
डिप्टी रजिस्ट्रार ने एडीएम सिटी को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर ने 28 अप्रैल 2026 को धार्मिक रामलीला समिति कविनगर की जांच कराने की मांग को लेकर डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में पत्र दिया था। इस मामले में जांच रिपोर्ट करते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय ने बताया कि वर्तमान प्रबंध समिति वर्ष 2017 से कालातीत है। वर्ष 2023-24 के दस्तावेजों का अवलोकन किया गया। जिसमें उपलब्ध कराए गए अभिलेखों से खुलासा हुआ कि यात्रा और दैनिक भत्तों का भुगतान केवल वाउचर के आधार पर किए गए हैं। लेकिन यात्रा बिल, रामलीला मंडली रूपए 3072318, मैदान मेंटीनेंस रूपए 829394, विद्युत बिल रुपए 1531760, शोभा यात्रा 2424405,साउंड खर्च पर 1129250, फर्नीचर एंड टैंट खर्च 1358742, व डोनेशन सक्षम फाउंडेशन को रूपए 1100000 सहित अन्य प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षा व्यय, शोभायात्रा, रामलीला मंडल के खर्चो की प्रतिपूर्ति, स्टेज की सजावट कर्मचारियों के वेतन आदि के भुगतान वाउचर से किया जाना दर्शाया गया है लेकिन बिल चालान कार्य विवरण माप पत्रक जैसे कोई उचित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं अधिकांश वाउचरों की राशि बैलेंसशीट से मैच नहीं करती। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि किसी भी कार्य को कराने के लिए संस्था द्वारा किए गए अनुबंध पत्र, बिजली बिल व अन्य पत्राजात प्रबंध समिति द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उपलब्ध कराए गए वाउचरों में कुछ पर किसी के हस्ताक्षर अंकित नहीं है, केवल राशि अंकित है। कार्य विवरण का कोई साक्ष्य संलग्न नहीं है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कार्यालय पत्रावली पर बिल, चालान कार्य विवरण मापपत्रक जैसे कोई सहायक दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण यह स्पष्टï नहीं हो पा रहा है कि वाउचर द्वारा कुल कितनी धनराशि का भुगतान किया गया है। जांच में यह भी डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा बताया गया है कि समिति द्वारा वित्तीय नियमों की अनदेखी कर वित्तीय प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया है। जबकि सोसायटी रजिस्टर एक्ट में यह प्रावधान है कि सोसायटी अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सोसायटी के कामकाज का संचालन इस तरह से किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कार्यालय द्वारा 21 मई 2026 व 12 जून 2026 को नोटिस जारी करते हुए आरोपों के विरूद्घ अध्यावधिक मूल अभिलेख मांगे गए थे, लेकिन आज तक वर्तमान प्रबंध समिति के अध्यक्ष-सचिव द्वारा मूल अभिलेख प्रस्तुत नहीं कराए गए हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार ने एडीएम सिटी को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए बताया कि वर्तमान प्रबंध समिति के गंभीर प्रवृत्ति के वित्तीय एवं प्रबंधकीय अनियमिताओं के लिप्त होने के कारण वतमान प्रबंध समिति के बैंक खातों एवं प्रबन्धकीय अधिकारों पर रोक लगा दी गई है। नियमावली के अनुसार समिति का कार्यकाल तीन वर्ष है, वर्तमान समिति का निर्वाचन 2014 में हुआ था। श्री धार्मिक रामलीला समिति के पंजीकृत बायलॉज के नियम 11 (3 )में संस्था के संचालन हेतु नवनिर्वाचन तक वही समिति कार्य करेगी। लेकिन 2014 की समिति विवादग्रस्त होने के कारण उनके अधिकारों पर रोक दी गई है। इतना ही नहीं डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा मामले की जांच निस्तारण तक पूर्व समिति पर रोक लगाते हुए समिति संचालन की व्यवस्था की जिम्मेदारी अध्यक्ष बनाते हुए राजकुमार को सौंपी है। साथ ही उन्हें कार्य करने की अनुमति भी दी गई है।