सदियों से एक कुत्सित प्रयास होता रहा है कि लोगों को मंदिरों में जाने से रोका जाए। गंभीर लोग जानते हैं कि इसके लिए कितने झूठ, कितने प्रपंच, कितनी अफवाहों का सहारा लिया जाता रहा है। चढ़ावा चढ़ाने से रोकने के प्रयास किए जाते रहे हैं। जबकि धर्म, शास्त्र और आचार्य चरण कहते हैं कि प्रत्येक सनातनी को मंदिर अवश्य जाना चाहिए। यह बात भी धर्म संवत ही है कि देवालयों में जाकर चढ़ावा भी अवश्य ही चढ़ाना चाहिए। कथाओं में सुनाया जाता है। जब भी आप किसी तीर्थ पर जाएं, किसी मठ या मंदिर में जाएं तो वहां से फल-फूल, मिष्ठान आदि सामग्री जरूर खरीदें। ताकि वहां रह रहे लोगों के सामान की बिक्री, उनकी आजीविका चले। उस स्थान पर वहां का स्थानीय भोज, जिसे साधारण भाषा में स्ट्रीट फूड भी कहा जाता है उसे भी अवश्य ही लें। आप यह समझ लीजिए कि मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए धन की आवश्यकता पड़ती ही है। यह धन आपके-हमारे चढ़ावे से ही आता है। चढ़ावा चोरी जैसी बाते सामने आने पर लोग चढ़ावे का विरोध करने लगे हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। चढ़ावा चोरी करने वालों को दो तरह से सजा मिलेगी, एक भगवान उन्हें उनके कर्मों के हिसाब से दंड देगा, दूसरा कानून अपने हिसाब से सजा देगा। लेकिन आपको और हमको धर्म का रास्ता नहीं छोडऩा है। यह बात समझ लीजिए कि ऐसी बातों को तूल वही देंगे जो सनातन के विरोधी होंगे। आज कल्कि में इतना बड़ा धाम बन रहा है, जिसे जगद्गुरू आचार्य प्रमोद कृष्णम बनवा रहे हैं। मुरादनगर में यति नरसिंहानंद गिरी इतना भव्य मंदिर बनवा रहे हैं। क्या बिना आप और हमारे सहयोग के ऐसा होना संभव है? इसलिए धर्म के बताए रास्ते पर चलिए। मंदिरों में लगातार जाना जारी रखें और चढ़ावा चढ़ाते रहें। धार्मिक स्थल पर दान देते रहें और स्थानीय वस्तुएं खरीदकर लोगों का हित करते रहें।