-इनमें दर्ज होती थी अपराधियों की संपूर्ण कुंडली
-अब यह सारी जानकारी स्थानांतरित कर दी गई यक्ष एप पर
प्रमुख अपराध संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। इस साल के पहले कुछ माह तक पुलिस महकमे के लिये अतिमहत्वपूर्ण दस्तावेजों में शुमार रहने वाले रजिस्टर नंबर ८ और रजिस्टर नंबर ४ अब न केवल पुलिस विभाग के लिये एक यादगार मेमोरी बन गये है बल्कि हाईटैक होती पुलिस के पास यक्ष एप जैसे हाईटैक रिकॉर्डर आने की वजह से अब ये दोनों रजिस्टर बस इतिहास के पन्ने बनकर रह गये हैं। अब अत्याधुनिक होती पुलिस ने हाईटैक तकनीकि से लैस क्रिमिनलों पर अंकुश लगाने और उनका अपराधिक इतिहास को पूरी तरह से सेफ रखने के लिये उच्च तकनीकि गुणवत्ता से युक्त हाईटैक सिस्टम का अपना लिया है। इसके चलते ही इन दोनों खास रजिस्टरों के स्थान पर पुलिस महकमे ने बदमाशों की कुंडली बनाने और उसे सुरक्षित रखने के लिये यक्ष एप को अपना लिया है।
पुलिस महकमे के लिये रजिस्टर नंबर ८ व ४ क्यों अति महत्वपूर्ण थे और इन दोनों रजिस्टरों में क्या क्या दर्ज होता रहा है और क्यों इन दोनों रजिस्टरों को पुलिस महकमें की मास्टर की समझा जाता रहा है इसे जानने के लिये बस इतना कहना ही काफी होगा कि ये दोनों रजिस्टर पुलिस महकमे के लिये गागर में सागर भरने की तरह के दस्तावेजिक प्रमाणपत्र रहे हैं। बता दें कि इन दोनों रजिस्टरों में बदमाशों के नाम वे पते से लेकर उनके जीवन भर का रिकार्ड दर्ज रहता था। अर्थात अगर किसी भी थाना पुलिस अथवा उच्वाधिकारी को किसी बदमाश की अपराधिक कुंडली अथवा उसके हालिया एवं भूतकाल की स्थिति का पता लगाना होता था तो वो बस रजिस्टर नंबर ८ और रजिस्टर नंबर ४ को खोल लेते थे। इन दोनों रजिस्टरों के पन्ने खोलते ही पुलिस को प्रत्येक बदमाश की अपराधिक कुंडली का पता पलक झपकते ही लग जाता था। इन दोनों रजिस्टरों में बदमाश का नाम, उसका स्थायी व वर्तमान का पता, उसके अपराध करने का तरीका और किसी अपराध को कारित करने में वो माहरत हासिल रखता है। कोई अपराधी अब तक कितनी और कौन कौन सी अपराधिक घटनाओं को अंजाम दे चुका है, वो कितनी बार जेल गया और कब से लेकर लेकर जेल में बंद रहा, उसकी जमानत किसने और क्यों कराई, जमानतियों के नाम व पते का पूरा ब्यौरा, क्या बदमाश की हिस्ट्रीशीट खुली हुई और अगर खुली है तो उसका एचएस नंबर क्या है। किस किस बदमाश पर गैंगस्टर कब और क्यों लगाई गई गई। गैंगस्टर के गिरोह में कौन कौन सदस्य हैं और उनकी अपराधिक इतिहास क्या है, इन सभी महत्वपूर्ण जानकारी का उल्लेख होता था। इसके अलावा किस किसी अपराधी को गुंड़ा एक्ट में निरूद्घ किया गया और उन्हें कब कब जिलाबदर किया गया। इसके अलावा शांतिभंग और ७-१६ जैसे निरूद्घात्मक कार्रवाई किन किन के खिलाफ और कब-कब क्यों की गई आदि बातों को पूरा उल्लेख भी इन दोनों रजिस्टरों में उल्लेखित होता था। वहीं अदालत से किस किस को कब कब जमानत मिली और किन किन के खिलाफ वारंट जारी हुए और उनकी तामिली स्थिति क्या है, ये आंकंड़े भी इन दोनों रजिस्टरों में बिन्दूवार दर्ज रहते थे। वहीं किस किस अपराधी पर कब कब कितने का ईनाम रखा गया और कौन कौन अपराधी फरार हैं और किस किसी बदमाश की मौत हो चुकी है, किस किसी बदमाश को हॉफ अथवा फुल एंकांउटर हुआ, ये सभी कार्रवाई भी इन दोनों रजिस्टरों में दर्ज होती थी। इसके अलावा स्थानी अपराधिक प्रवृत्ति वाले और ऐसे व्यक्ति जिनकी शोहरत ए आम खराब होती अथवा अराजक, शरारती एवं फिजा व सांप्रदायिक सौहार्द को खराब करने वाले तत्वों का पूरा ब्योरा भी इन दोनों रजिस्टरों में दर्ज रहता था। इसके अलावा भी इन रजिस्टरों में पुलिस के काम से संबंधित अनेक उपयोगी जानकारियां इन दोनों रजिस्टरों में समाहित रहती थी।
रजिस्टर नंबर ८ व ४ से पता चलता था चौकीदारों व गणमान्य लोगों का पूरा ब्यौरा
रजिस्टर ८ व ४ पुलिस महकमे के लिये क्यों इतने महत्वपर्ण थे इस बात को समझने के लिये यहां यह बताना जरूरी है कि इन दोनों रजिस्टरों में जहां बदमाशों व उनका संपूर्ण अपराधिक इंतिहास दर्ज होता था वहीं इन दोनों में ही थाना क्षेत्र के सभी चौकीदारों, संभ्रांत एवं गणमान्य व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों और पुलिस के सहयोगियों के अलावा अन्य उपयोगी व्यक्तियों के नाम पते और उनका पूरा ब्यौरा दर्ज किया जाता था। इसके अलावा कौन कौन से इलाके संवेदनशील व अतिसंवेदनशील हैं और कौन कौन खुरापाती व्यक्ति हैं इसका उल्लेख भी क्रमानुसार इन दोनों रजिस्टरों में दर्ज होता था।
रजिस्टर नंबर ८ व ४ में अंतर क्या था
रजिस्टर नंबर ८ और रजिस्टर नंबर ४ में यूं तो समान डेटा दर्ज रहता था लेकिन इन दोनों महत्वपूर्ण रजिस्टरों के बीच का मुख्य अंतर यह था कि जहां रजिस्टर नंबर ४ एकसाला यानि एक वर्ष के आंकड़े दर्ज करने के लिये बनाया जाता था वहीं रजिस्टर नंबर ८ बहुसाला होता था। कहने का तात्पर्य यह है कि रजिस्टर नंबर ८ में साल दर साल के अपराधिक आंकडों को दर्ज किये जाने का सिलसिला निरंतर जारी रहता था।
अब इन दोनों रजिस्टरों का स्थान ले लिया है यक्ष एप ने
हर महकमे में तेजी से शुरू हो रही अत्याधुनिकरण एवं कागजविहीन प्रक्रिया को पूरी तरह से सुदृढ़ करने के लिये अब पुलिस महकमें ने भी कमर कस ली है। इसके चलते ही पुलिस महकमें ने भी खुद को हाईटैक करते हुए पेपरलैस बनाने वाले तकनीकि को अपनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत अब पुलिस ने जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपनाकर रजिस्टरों के स्थान पर हाईटैक तकनीकि वाले आईजीआरएस व एनसीआरपी जैसे पोर्टल, सोशल साईट और एप का अपना लिया है वहीं पुलिस ने ऑनलाइन सिस्टम के समाहित करके ई एफआईआर, ई चालान और ई सम्मन वाली तकनीकि अपनानी शुरू कर दी है। इसके तहत ही पुलिस महकमे ने रजिस्टर नंबर ८ व ४ जैसे अतिमहत्वपूर्ण रजिस्टरों का पूरा डेटा यक्ष एप पर ट्रांसफर करके इन दोनों रजिस्टरों का कार्य इस उच्चतकनीकि क्षमता वाले एप से करना शुरू कर दिया है। इस एप के माध्यम से कार्य करने पर अब पुलिस को जहां रोजाना कागजी कार्रवाई करनी नहीं पड़ती है वहीं एक क्लिक करते ही किसी भी क्रिमिनल की क्राइम हिस्ट्री पलक झपकते ही पुलिस व उच्चाधिकारी के सामने खुल जाती है। पुलिस महकमे को हाईटैक बनाने की प्रक्रिया में जहां प्रतिदिन नई नई हाईटैक तकनीकि पुलिस की कार्यप्रणाली को और अधिक तीव्रगामी एवं उपयोगी बनाती हुई दिखाई दे रही हैं वहीं यह प्रक्रिया कई शताब्दियों तक पुलिस महकमे की मास्टर की समझी जाने वाली रजिस्टर नंबर ८ व ४ जैसी अतिमहत्वपूर्ण ग्रथावलियों को इतिहास बनाती अर्थात इन्हें गायब करती हुई दिखाई दे रही है।