गाजियाबाद (युग करवट)। वरिष्ठ भाजपा नेता पृथ्वी सिंह कसाना ने राजनाथ सिंह के व्यक्तित्व पर अटल बिहारी वाजपेई की कविता पंक्ति हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा सुनाई तो सभागार तालिया से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो अटल जी ने ये पंक्तियां राजनाथ सिंह जी के व्यक्तित्व को देखकर ही लिखी हों। सभागार में उस समय पुन: तालियां बजीं जब अटल जी की उस पंक्ति से आगे की कविता राजनाथ सिंह ने स्वयं सुनाई।
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं।
राजनाथ सिंह ने ये पंक्तियां सुनाई
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात
कोयल की कुहुक रात प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं, गीत नया गाता हूं।