नई कमेटी को लेकर उठने लगे सवाल
लंबे इंतजार के बाद भाजपा की जो प्रदेश कमेटी घोषित की गई है उस पर सवाल खड़े होने लगे हैं। नई कमेटी में पुराने तमाम लोगों को दरकिनार कर दिया गया। ऐसे चेहरे आ गये जिनको भाजपा के लोग ही नहीं जानते। सूची जारी होने के बाद दशकों से भाजपा में रहने वाले पदाधिकारी और कार्यकर्ता एक दूसरे से फोन करके मालूम कर रहे हैं कि ये कौन लोग हैं। दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी जी वाली भाजपा और आज की भाजपा में जमीन आसमान का फर्क आ गया। ये ठीक है कि आज पार्टी का सितारा बुलंद है लेकिन जिन कार्यकर्ताओं की बदौलत ये सितारा बुलंद हुआ है अगर उनको भुला दिया गया तो फिर तस्वीर कुछ भी हो सकती है। अब सूची पर गौर करें तो इसमें प्रदेश पदाधिकारी ऐसे बनाये गये हैं जो भाजपा के प्राथमिक सदस्य भी नहीं है। उन्होंने अभी तक भाजपा भी ज्वाइन नहीं की है। वो दूसरे दल से विधायक बने और आज भी उसी में हैं लेकिन भाजपा की सूची में उन्हें प्रदेश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। जाहिर है कि इस तरह की नियुक्ति से सवाल तो खड़े होंगे ही। सर्दी, गर्मी, बरसात पार्टी का झंडा बुलंद करने वाले सब हाशिए पर चले गये। दो से तीन लोग ऐसे थे जो प्रदेश के अध्यक्ष के आगे पीछे साये की तरह घूम रहे थे लेकिन उनका भी कहीं लिस्ट में नहीं है। हालांकि २०२७ के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सूची बनाई गई है। लेकिन क्या ऐसे लोग २०२७ का बेड़ा पार करा पाएंगे ये बड़ा सवाल है। क्षेत्रीय अध्यक्ष के पद पर नवाब सिंह नागर की नियुक्ति होने से जरूर गुर्जर समाज की नाराजगी दूर हुई है। नवाब सिंह नागर अपने समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। बहुत लोप्रॉफाइल उनका जीवन है और पार्टी ने उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी है इससे जरूर हाशिए पर रहने वाले कार्यकर्ताओं की उम्मीद बढ़ी है। लोनी के डॉ. परमिन्दर जांगड़ा को जिम्मेदारी देकर एक अच्छा संदेश दिया है लेकिन बाकी जो नाम है उन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर नवाब सिंह नागर और जांगड़ा की तरह ही समर्पित कार्यकर्ताओं को यूपी की लिस्ट में जगह मिलती तो बहुत अच्छा संदेश जाता। सेटिंग के आधार पर जगह पाने वाले पार्टी के लिए कितना फायदेमंद रहेंगे ये समय ही बतायेगा। जय हिंद