अगर व्यक्ति की मंशा सही हो तो उसे किसी से कुछ छुपाने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कुछ छुपाने का प्रयास किया जाता है तो संशय और संदिग्धता दोनों पैदा हो जाती हैं। अंबेडकर रोड से होकर निकलने वाले लोग हैरान और परेशान हैं जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र की तकरीबन 15 फुट ऊंची दीवार को लेकर। बहुत वर्षों से हम सभी देखते आ रहे हैं कि जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र अंबेडकर रोड के साइड वाली दीवार लगभग चार या पांच फुट की रही थी। अंबेडकर रोड से आने जाने वाले लोग कुछ समय रुक कर क्रिकेट का लुत्फ बाहर से ही ले लिया करते थे। मैदान पर क्या गतिविधियां चल रहीं हैं इसका दीदार बाहर से ही सभी को हो जाता था। मगर पिछले कुछ समय से जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र न जाने क्यों संदिग्ध हो गया है। बाहर की पांच फुट की दीवार को तकरीबन 15 फुट ऊंचा कर दिया गया है। अब ऐसा वहां क्या किया जाएगा जिसे छुपाने के लिए दीवार की ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत पड़ी? इसका जवाब तो जिला प्रशासन या जीडीए ही दे सकता है। अंदर क्या गतिविधियां चल रही हैं इस बारे में वर्तमान के संचालक ही बता सकते हैं। किसी भी विवाद या गलतफहमी को पैदा होने से रोकने के लिए संचालकों को पब्लिकली बताना भी चाहिए। क्योंकि अब शहर में जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र को लेकर तरह तरह की बातें कहीं जाने लगी हैं। इन बातों की आंच एक बड़े जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि तक तो पहुंच ही चुकी हैं, ऐसा ना हो कि इसकी तपिश जनप्रतिनिधि तक ही पहुंच जाए। इसलिए समय रहते चीजों को क्लियर कर देना ही उचित रहेगा। इन्हीं जनप्रतिनिधि के पूर्व में प्रतिनिधि रहे व्यक्ति के कारण भी विवाद की स्थिति बन गई थी और आज उन प्रतिनिधि का कहीं कुछ अता पता नहीं है। हमारे यहां तो कहावत भी है कि दूध का जला छाछ भी फूंक कर पीता है। तो एक बार जो स्थिति बन चुकी उसे दोबारा क्यों पैदा होने दिया जा रहा है। अगर आरोप तनिक से भी सही हो गए तो प्रतिनिधि तो हाथ झाड़ कर चल देंगे, दोष जनप्रतिनिधि पर आने की आशंका बढ़ जाएगी। वैसे भी अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र को मुद्दा बनाने की राह पर आ गई है। इसलिए बड़ा संभलकर चलने की जरूरत है। प्रशासन को भी दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए।