23 जून डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष हैं। जनसंघ ही बाद में भारतीय जनता पार्टी बना। सभी जानते हैं कि आज भी भारतीय जनता पार्टी में डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सर्वाधिक सम्मान के साथ याद किया जाता है। जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है, इस नारे को लगा लगाकर कितने ही लोगों ने संघर्ष किया और आज भाजपा में बड़े-बड़े पदों पर आसीन है। ऐसे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अगर कहीं उपेक्षा हो जाए तो क्या कहिएगा। मगर ऐसा हुआ है, और आपके-हमारे गाजियाबाद में ही हुआ है। यहां डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क है, जिसमें उनकी विशालकाय प्रतिमा स्थापित है। अशु कुमार वर्मा जब गाजियाबाद के मेयर थे तब उन्होंने इस पार्क में भारतीय राष्टï्रीय ध्वज भी स्थापित किया गया था। आज यह पार्क बदहाल स्थिति में है। राष्टï्रीय ध्वज वहां है नहीं है केवल खाली पोल खड़ा हुआ है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर धूल रहती है, उसका फ्रेम क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस बात की गवाही पूर्व मेयर अशु कुमार वर्मा की पोस्ट भी देती है। उन्होंने लिखा है कि प्रतिमा की हालत खराब थी, वहां सफाई भी नहीं हुई। मौके पर मौजूद मालियों से उन्होंने पूछा कि सफाई क्यों नहीं की गई तो उत्तर मिला किसी ने ना जानकारी दी, ना आदेश दिया। अशु वर्मा लिखते हैं कि उसके बाद उन्होंने खुद पानी चलाकर प्रतिमा को साफ किया। जहां तक जानकारी है कि उसके बाद शहर विधायक संजीव शर्मा भी डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क पहुंचे और श्रद्घासुमन अर्पित किए। मगर भाजपा का संगठन कहीं दिखाई नहीं दिया। संजीव शर्मा के अलाया किसी जनप्रतिनिधि की फोटो उस पार्क की नहीं दिखाई दी। बताया जाता है कि भाजपा महानगर अध्यक्ष की तरफ से कहा गया कि लखनऊ कोचिंग सेंटर में हुए हादसे की वजह से संगठन के सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए थे। मगर लखनऊ में सीएम और डिप्टी सीएम ने तो डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्घासुमन अर्पित किए थे। फिर गाजियाबाद में भाजपा संगठन को किसने डॉक्टर मुखर्जी को श्रद्घांजलि देने से इंकार कर दिया था? नगर निगम ने एक दिन पहले ही पार्क में सफाई क्यों नहीं कराई? डाक्टर मुखर्जी की प्रतिमा को सजाया क्यों नहीं गया? वहां धुलाई तक नहीं की गई, इसकी जिम्मेदारी किसकी है? नगर निगम ने शहर भर में महापुरूषों की प्रतिमाओं की देखरेख का टेंडर छोड़ा हुआ है, फिर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों? गाजियाबाद में डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की इतनी उपेक्षा क्यों।