लखनऊ अग्निकांड
लखनऊ का अग्निकांड जिसने कई मांओं का आंचल सूना कर दिया, बहन से भाई छीन लिया, बाप का सहारा छीन लिया, अब बस केवल उन मासूम बच्चों की यादें ही रह गई। कार्रवाई के नाम पर अब सरकार ने कोचिंग सेंटरों के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई शुरू की है। ताबड़तोड़ छापेमारी हो रही है, सौ से अधिक सेंटर सील कर दिये गये हैं, लेकिन इस बीच बड़े सवाल भी सामने आ रहे हैं। चाहे पुलिस का बयान हो, प्राधिकरण का बयान हो या किसी भी सरकारी विभाग का बयान हो सभी का कहना है कि सब संचालन अवैध रूप से हो रहा है। आखिरकार जब ये अवैध रूप से हो रहा था तो इसका जिम्मेदार कौन है। कौन इस अवैध को वैध ठहरा रहा था। केवल जेई और एई को सस्पेंड करके क्या सरकार की बस यहीं तक जिम्मेदारी है। कितने सालों सेे ये अवैध चल रहे थे इसकी पूरी जन्मकुंडली निकलना चाहिए। कौन इसके लिए जिम्मेदार है उससे उसकी वसूली होना चाहिए। छोटी मछलियों के बदले बड़े मगरमच्छों पर कार्रवाई होना चाहिए। जब तक छोटी मछलियों पर कार्रवाई होती रहेगी ये सबकुछ चलता रहेगा। नौकर पर नौकर, चाकर पर चाकर की रणनीति बंद होना चाहिए। विभाग के मुखिया पर कार्रवाई हो, इसके अलावा उसकी जो मॉनिटरिंग करता है उस पर कार्रवाई हो। अफसोस इस बात का है छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हो जाती है और बड़े लोग बच जाते हैं। इसी वजह से ये धंधे चालू हैं। तीसरी आंख ने देखा कि अब तक केवल सेंटर बंद हो रहे हैं इसके अलावा कोई बड़ी कार्रवाई अभी तक नहीं हो पायी है। फिर वही जिदंगी शुरू हो गई, बड़े अफसर अपने काम में लग गये हैं लीपापोती शुरू हो गई है, कागजों में छापेमारी जारी है, मुख्यमंत्री को बताया जा रहा है कि लखनऊ से लेकर बड़े जनपदों में सेंटर सील कर दिये गये हैं, लेकिन ये कोई नहीं बता रहा है कि ये सेंटर कब से चल रहे थे और इनकी अनुमति थी या नहीं थी, किस-किस विभाग की गलती थी, आवासीय क्षेत्रों में कैसे कमर्शियल एक्टिीविटीज हो रही थी। बस केवल सबकुछ कागजों में चल रहा है। एक सप्ताह बाद लोग भूल जाएंगे, मुख्यमंत्री भी अपने सरकारी कार्यों में लग जाएंगे, उप मुख्यमंत्री जो घटना वाले दिन बड़े भावुक थे वो भी पुरानी सरकारों पर आरोप लगाते रहेंगे और फिर ऊपर वाला ना करे कोई दर्दनाक घटना हो जाएगी और हर बार की तरह वही जांच, वही सस्पेंशन और सबकुछ टाय-टाय फिश। सरकार को चाहिए इस बार ऐसी व्यवस्था करे कि फिर ऐसी कोई घटना ना हो। मौजूदा योगी सरकार से ही उम्मीद है कि वो जरूर कोई ऐसा एक्शन लेगी जिससे मगरमच्छ भी पकड़ में आएगे। वरना पिछली सरकारों से तो कोई उम्मीद लोग नहीं करते थे। बहरहाल, कागजी तौर पर नहीं जमीनी तौर पर एक्शन होना चाहिए।
जय हिंद