गाजियाबाद जिले में सदर सीट का अपना अलग ही महत्व है। जब से यह सीट अस्तित्व में आई है इस पर बसपा के सुरेश बंसल, भाजपा के अतुल गर्ग विधायक चुने गए। वर्तमान में भाजपा के ही संजीव शर्मा गाजियाबाद सदर सीट से विधायक हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी इस सीट पर भाग्य आजमाइश की है, मगर उसकी झोली खाली ही रही। भाजपा के अतुल गर्ग के सामने एक कांग्रेस पूर्व सांसद दिवंगत सुरेन्द्र प्रकाश गोयल के पुत्र सुशांत गोयल को भी आजमा चुकी है। मगर कांग्रेस को इससे कोई लाभ हुआ नहीं और अतुल गर्ग एक अच्छी बढ़त से चुनाव जीते। अतुल गर्ग के सांसद बन जाने के बाद हुए उपचुनाव में गाजियाबाद सदर सीट पर भाजपा ने संजीव शर्मा को उतारा तो सपा-कांग्रेस गठबंधन ने सिंहराज को और बसपा ने पीएन गर्ग को प्रत्याशी बनाया था। सभी जानते हैं कि परिणाम क्या आया। भाजपा के संजीव शर्मा ने जीत का रिकार्ड बनाया और सपा उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा सके। अब फिर से विधानसभा चुनाव आ रहा है। गाजियाबाद सदर सीट पर कमी ना भाजपा में टिकट मांगने वालों की है, ना सपा में। टिकट पाने की जुगत में हरसंभव काम किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी में सदर सीट पर अभिषेक गर्ग भी टिकट मांग रहे हैं। अब सवाल यह है कि अगर सपा अभिषेक गर्ग को टिकट दे देती है तो क्या चुनाव के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं? लोग कहते हैं कि सुरेश बंसल और अतुल गर्ग दोनों वैश्य समाज से इस सीट पर जीत हासिल कर चुके हैं। इसका मतलब वैश्य वर्ग का इस सीट पर वर्चस्व है। तो अभिषेक गर्ग मजबूत चुनाव लड़ सकते हैं। मगर फिर बात सुशांत गोयल की आती है, तो वैश्य वर्ग की दावेदारी निष्फल नजर आती है। मगर तर्क यह भी है कि जब सुशांत गोयल चुनाव लड़े थे तब सपा-कांग्रेस का गठबंधन नहीं था। सपा का उम्मीदवार भी चुनाव में था। वैश्य वर्ग का पूरा समर्थन अतुल गर्ग के साथ था। कांग्रेस का कैडर वोट बहुत कम था, जो था वह भी मिला नहीं। सुशांत को केवल अपना निजी वोट मिला था। अब अगर अभिषेक गर्ग को सपा चुनाव लड़ा दे तो उनके पास सपा का वोट बैंक रहेगा, कांग्रेस का भी कुछ वोट वह ले जाएंगे, वैश्य वर्ग का भी समर्थन अभिषेक गर्ग ले ही जाएंगे। इसके साथ ही एंटी इंकम्बैंसी वोट भी सपा ले जा सकती है। इस हिसाब से देखा जाए तो अभिषेक गर्ग सपा के टिकट पर भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में हैं।